खण्ड - III अछूतों को भारत के राजनीतिक क्षितिज पर लाने और भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला रखने में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की भूमिका - Page 167

150 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

(घ) संयुक्त निर्वाचकमंडल प्रणाली तथा आरक्षित सीट प्रणाली के माध्यम से दलित वर्गों का विशेष प्रतिनिधित्व का अधिकार उनके लिए अगले 15 वर्ष तक जारी रहेगा। इस अवधि के बाद, दलित वर्गों के मतदाताओं के जनमत संग्रह के आधार पर इस मामले में निर्णय लिया जाएगा।

(ड.) केंद्रीय विधायिका के दोनों सदनों में दलित वर्गों को विशेष प्रतिनिधित्व के अधिकार की पहचान जनसंख्या अनुपात के अनुसार उन्हीं शर्तों तथा उसी पद्धति के मुताबिक की जाएगी जैसाकि प्रांतीय विधायिकाओं के मामले में किया गया है।

(च) कम से कम दलित वर्गों के लिए तो प्रौढ़ मताधिकार होगा। दलित वर्गों के लिए प्रांतीय तथा केंद्रीय विधायिकाओं के लिए मताधिकार एक-समान होगा।

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भाग दो : स्थानीय बोर्ड
  1. दलित वर्गों को विद्यमान तथा भविष्य में जनसंख्या के आधार पर गठित किए जाने वाले सभी प्रांतों में सभी नगर-निगमों, स्थानीय बोर्डों, जिला और तालुक, ग्राम यूनियनों, पंचायतों के स्कूल बोर्डों और किसी भी स्थानीय निकाय में प्रतिनिधित्व की अनुमति होगी।

  2. सभी केंद्रीय तथा स्थानीय लोक-सेवाओं में दलित वर्गों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में न्यूनतम नियुक्ति की गारंटी होगी लेकिन अर्हताएं इसके लिए निर्धारित अनुसार ही रहेंगी। शैक्षिक को छोड़कर, इन मामलों के विद्यमान सांविधिक नियमों में ढील देकर कोटे तक पहुंचने की व्यवस्था की जाएगी।

  3. कनाडा के संविधान की धारा 93 के अंतर्गत उल्लिखित शर्तों एवं विधि अनुसार, संविधान में यह प्रावधान होगा जिसके तहत दलित वर्गों को शिक्षा, साफ-सफाई, लोक-सेवाओं में भर्ती, आदि से जुड़े मामलों के संबंध में उनके हितों की अनदेखी होने की स्थिति में गवर्नर और वायसराय को अपील करने का अधिकार होगा।’’ ख्1,

‘‘सर तेज बहादुर सप्रू ने आरक्षित सीटों के लिए प्राथमिक तथा माध्यमिक मतदाताओं की एक सर्वोच्च संस्था की रूपरेखा प्रस्तुत की। इस पर डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि वे अपने साथियों से परामर्श करके अपने प्रस्ताव सहित दो घंटे में लौटते हैं - डॉ. अम्बेडकर रात को लौटे और कहा कि उन्हें यह प्रस्ताव स्वीकार्य है, लेकिन उन्होंने ब्रिटिश प्रधान मंत्री द्वारा उन्हें दी गई सीटों से कहीं अधिक सीटों की मांग की।’’

  1. जनता, दिनांक 24 सितम्बर, 1932 ।