152 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
बातचीत की और उन्होंने उन्हें कल विचार-विमर्श के दौरान तैयार की गई स्कीम का खुलासा किया। यह बैठक काफी आशावादी रही, लेकिन श्री गांधी ने अपनी अंतिम राय डॉ. अम्बेडकर और डॉ. एम. सी. राजा सहित अपने मित्रों से इस मामले में आगे परामर्ष करने तक आरक्षित रखी थी।
अतः प्रतिनिधिमंडल पूना में एक और दिन रुकेगा। सर टी. बी. सपू्र जिन्होंने इस स्कीम को प्रारंभ किया था, काफी आशावादी थे कि यह श्री गाँधी को स्वीकार्य होगी और इस तरह से समस्या का हल निकल आएगा। प्रतिनिधिमंडल ने यह पाया कि श्री गांधी भले चंगे और काफी प्रसन्नचित्त थे।’’ ख्1,
डॉ. अम्बेडकर अर्द्धरात्रि की रेलगाड़ी से रवाना हो गए। * उसी दिन राजा और मालवीय भी बंबई से पूना के लिए रवाना हो गए।
बृहस्पतिवार की सुबह, अर्थात् 22 सितम्बर, 1932 को गाँधी ने डॉ. राजेन्द्र प्रसाद और राजगोपालाचारी से बात की और यह कहा कि उन्हें यह पसंद नहीं है कि कुछ आरक्षित सीटों पर चुनाव प्राथमिक माध्यमिक निर्वाचन प्रणाली से हो और कुछ में केवल संयुक्त निर्वाचकमंडल प्रणाली से हो। उन्होंने कहा कि प्राथमिक व माध्यमिक निर्वाचनप्रणाली को सभी सीटों पर समान रूप से लागू किया जाए। यह नेशनल होटल में डॉ. अम्बेडकर को बताया गया था। वातावरण फिर गर्मा गया था। कुछ नेताओं ने यह सुझाव दिया कि इस बीच उन्हें ब्रिटिश प्रधान मंत्री को एक केबल मेज कर उनसे यह अनुरोध करना चाहिए कि वे दलित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचकमंडल की प्रणाली को रद्द कर दें।’’ ख्2,
उसी दिन प्रातः 9 बजे सर तेज बहादुर सप्रू और बैरिस्टर जयकर नेशनल होटल में डॉ. अम्बेकर से मिले तथा उन्हें उपर्युक्त तथ्यों से अवगत कराया।’’ ख्3,
‘‘लेकिन डा. अम्बेडकर ने उन्हें कड़े शब्दों में और स्पष्ट रूप से कह दिया कि वे ब्रिटिश प्रधान मंत्री द्वारा उन्हें प्रदान की गई पृथक निर्वाचकमंडल प्रणाली को
खोने के लिए तैयार हैं बशर्ते कि उन्हें इसके बदले में प्रस्तावों की एक ठोस रूपरेखा उपलब्ध कराई जाए तथा यह भी कहा कि वे किसी मरीचिका के पीछे भागने वाले व्यक्ति नहीं हैं। नीरस वातावरण के कारण अशुभ निराशा पसर गई थी। दोपहर को जयकर, सप्रू और मालवीय जेल में गाँधी से मिले। उनके बाद, पी. बालू और राजा
- * 2.3. दि टाइम्स ऑफ इंडिया, दिनांक 22 सितम्बर, 1932 ।डॉ. अम्बेडकर के साथ डा. सोलंकी भी थे - सम्पादकगण।कीर, पृष्ठ 210 ।जनता, 1 अक्तूबर, 1932 ।