खण्ड - III अछूतों को भारत के राजनीतिक क्षितिज पर लाने और भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला रखने में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की भूमिका - Page 171

154 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

डॉ. अम्बेडर ने कहा : ‘‘जी, महात्मा जी, मेरी रुचि है। यदि आप स्वयं को पूरी तरह से दलित वर्गों के कल्याण के लिए समर्पित कर दें तो आप हमारे नायक बन जाएंगे।’’

गाँधी : ‘‘ठीक है, यदि आप मेरे जीवन में रूचि रखते हैं तो आपको पता होगा कि इस जीवन को बचाने के लिए आपको क्या करना है। आपने मुझे जो कुछ भी बताया है, उसके मुताबिक आपकी स्थिति इस प्रकार की है। प्रधान मंत्री के निर्णय के अंतर्गत आपको जो कुछ भी मिल चुका है उसका त्याग करने हेतु सहमत होने के लिए आपको उसका पर्याप्त मूल्य तथा मुआवजा चाहिए। आपका कहना है कि आपके द्वारा प्रस्तावित मतदान की दोहरी प्रणाली अन्य दलों को ऊपर उठने का पर्याप्त अवसर देती है, जबकि नामावली प्रणाली के अंतर्गत भरी जाने वाली सीटों की रूपरेखा ऐसी है कि वह आपके समूह की महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति करती है। तथापि, मुझे जो परेशान करता है, वह यह है। आप कुछ सीटों के लिए ही नामावली प्रणाली का प्रस्ताव क्यों करते हैं? आप सभी सीटों के लिए यह प्रस्ताव क्यों नहीं करते? यदि नामावली प्रणाली एक तबके के लिए अच्छी है तो यह सभी दलित वर्गों के लिए अच्छी होनी चाहिए। मैं इस प्रश्न को इसी नजरिए से देखता हूं। आप जन्म से अछूत हैं, लेकिन अब मैं कुछ ऐसा कहने जा रहा हूं जो मेरी स्थिति के एक व्यक्ति के लिए एक विस्मयकारी दावा प्रतीत हो सकता है, मैं अंगीकरण द्वारा एक अछूत हूं और मन से आपसे भी कहीं बड़ा ‘‘अछूत’’ हूं। एक स्कीम जो वास्तव में अच्छी है उसे एकाध समूह के हितों के प्रति ही नहीं समूचे दलित वर्ग के लिए उपयोगी होना चाहिए। इसी मानदंड के आधार पर मैं इस स्कीम को देखता हूं। मेरा पहला सुझाव आपको यह है कि यदि नामावली प्रणाली दलित वर्ग के किसी तबके के लिए अच्छी है तो इसे दलित वर्ग की सभी सीटों तक विस्तारित किया जाना चाहिए। मैं आपके इस विचार के साथ खड़ा हो पा रहा हूं कि आपके समुदाय को या तो सैद्धांतिक रूप से या फिर व्यावहारिक रूप से मुझसे अलग कर दिया जाना चाहिए। हमें एक तथा अखंड होना चाहिए। जैसा कि मैंने अन्य मित्रों को बताया है, मुझे कुछ सीटों के लिए एक नामावली का चुनाव करने की आपकी स्कीम को स्वीकार करने में कोई कठिनाई महसूस नहीं हो रही है। मैं चाहता हूं कि आप ऐसा सभी सीटों के लिए करें। मैं मानता हूं कि मैं इस स्कीम को इसके वर्तमान स्वरूप में पसंद नहीं करता। यह आपके समुदाय को विभाजित करेगी और फिर मुझे इसे रोकने के लिए अपना जीवन देना पड़ेगा, जैसा कि मैं अब समूचे हिन्दू समुदाय के विघटन को रोकने के लिए अपना जीवन दे रहा हूं। (एपिक फास्ट पृष्ठ 209-210)।’’ ख्1,

  1. पुनः मुद्रित, खैरमोर, खंड 5, पृष्ठ 45-46 ।