खण्ड - III अछूतों को भारत के राजनीतिक क्षितिज पर लाने और भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला रखने में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की भूमिका - Page 175

158 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

‘‘डॉ. अम्बेडकर का जीवन खतरे में :

पूना के विद्यार्थियों की गुप्त बैठक, जान से मारने की धमकी’’

पूना, दिनांक 23.9.1932, रात 8 बजे

(जनता के विशेष रिपोर्टर द्वारा)

‘‘दो दिन बीत गए। बातचीत लगातार जारी है। डॉ. अम्बेडकर पर दबाव डालने के लिए विभिन्न प्रयोग किए जा रहे हैं। पता चला कि गोगेट सम्प्रदाय का अनुसरण करने वाले विद्यार्थी, जिन्होंने गवर्नर पर गोली चलाई थी, गुप्त योजना बना रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि यदि डॉ. अम्बेडकर को इस घटनाचक्र से हटा दिया जाता है तो सब कुछ ठीक हो जाएगा और गांधी का जीवन बच जाएगा। जब डॉ. अम्बेडकर को इस बारे में बताया गया तो वे हंसने लगे। संभवतः भय रहित उनकी यह हंसी इस बात की द्योतक थी कि वे मौत से डरने वाले नहीं हैं। तथापि, स्थानीय अछूत समुदाय डॉ. अम्बेडकर की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और वे सतर्क हैं। यदि डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को खरोंच भी आती है तो स्थिति गंभीर हो जाएगी। हजारों अछूत युवा उनके लिए कोई भी कुर्बानी देने को तैयार हैं। सभी चिंतित हैं कि गांधी जी की शपथ का इतना हिंसक अंत नहीं होना चाहिए।’’ ख्1,

‘‘जो नेतागण रात 9.30 बजे महात्मा जी से मिलने गए थे कुछ समय बाद लौट आए, वे थके हुए लग रहे थे लेकिन प्रसन्नचित थे। डॉ. अम्बेडकर को यह कहते हुए सुना गया ‘‘गाँधी जी मेरी ओर हैं।’’

‘‘नेतागण शनिवार सुबह 8 बजे सम्मेलन में फिर से मिलेंगे और उसके कुछ देर बाद गांधी जी से मिलेंगे। वर्तमान राय यही है कि पूर्ण समझौता होने वाला है और यदि कोई दुर्भाग्यपूर्ण घटना नहीं होती है तो शनिवार दोपहर को एक निश्चित समझौते का एक सुखद समाचार तत्क्षण प्रसारित होगा।

प्रमुख महत्व के मुद्दों पर जो विवाद था उसे लगभग समाप्त कर दिया गया है और दूरस्थ भावी तारीख पर दलित वर्गों का जनमत संग्रह करने के प्रश्न पर बस केवल सैद्धांतिक विवाद ही शेष रह गया है। ऐसा समझा जाता है कि नेतागण 10 वर्ष के बाद जनमत संग्रह कराने के लिए संभवतः सहमत हो जाएं।

  1. प्रत्येक सीट पर चुनाव हेतु 4 व्यक्तियों की एक नामावली।

  2. एक एकल मत।

  3. जनता, दिनांक 24 सितम्बर, 1932 ।