खण्ड - III अछूतों को भारत के राजनीतिक क्षितिज पर लाने और भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला रखने में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की भूमिका - Page 176

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  1. सभी प्रांतीय परिषदों में दलित वर्गों के लिए आरक्षित कुल सीटों की संख्या 150 से 155 के बीच होगी, जबकि साम्प्रदायिक अधिनिर्णय में 71 सीटों की अनुमति दी गई है।

इस सम्मेलन का आयोजन पंडित मालवीय के घर पर किया गया था। सम्मेलन सुबह जल्दी प्रारंभ हो गया था और तेरह से भी अधिक घंटों तक, बिना किसी रुकावट के लगातार चलने के बाद रात 9.30 बजे समाप्त हुआ। इसके बाद, पंडित मालवीय, सी. राजागोपालाचारी, श्री जयकर, डॉ. सप्रू, डॉ. अम्बेडकर और अन्य ने जल्दी से यरवदा जेल के लिए प्रस्थान किया।

सम्मेलन के दौरान, मालवीय जी के घर पर उत्सुक भीड़ का जमावड़ा रहा। रात 9.30 बजे जब नेतागण उठे, तो उस रात समझौते की कोई आशा नहीं थी।

नेतागण समय से लड़ रहे हैं, आज मध्याह्न भोज और रात्रि भोज के साथ-साथ विचार-विमर्श भी जारी था।

जहां पहले वे गंभीर तथा तन्मय नजर आ रहे थे, शाम को दीवारों के पीछे से ठहाकों की आवाजें आ रही थीं।

सवर्ण हिन्दू और दलित वर्गों के नेताओं का सम्मेलन आज सुबह 9 बजे मालवीय के घर पर बंद कमरे में आरंभ हुआ। ऐसा समझा जाता है कि सम्मेलन के दौरान विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई और चुनाव के लिए नामावली तथा संयुक्त प्रांतों के अलावा, प्रतिनिधित्व के आधार पर प्रश्नों के बारे में एक समझौते पर पहुंच गए हैं, जबकि इस बारे में अभी अंतिम रूप से कुछ कहा नहीं गया है।

नामावली के बारे में डॉ. अम्बेडकर की दो की मांग और गाँधी जी के पांच के सुझाव की तुलना में चार व्यक्तियों की नामावली तय की गई है।

देर शाम संवाददाताओं की उत्सुक आशंकाओं के जबाव में डॉ. सप्रू ने कहा कि ‘‘अभी तक बातचीत संतोषजनक रही है और हम इसके लिए रात को भी बैठने को तैयार हैं।’’

सम्मेलन के बाद डॉ. अम्बेडकर ने कहा-

‘‘स्थिति आशावादी है। संगीन किस्म के विवाद कुछ ही हैं, और समझौते के आसार हैं। अनशन की वजह से गांधी जी कमजोरी महसूस कर रहे हैं लेकिन उन्होंने पंद्रह मिनट से भी अधिक समय तक हमसे बातचीत की।’’ ख्1,

  1. द फ्री प्रेस जरनल, दिनांक 24 सितम्बर, 1932 ।