खण्ड - III अछूतों को भारत के राजनीतिक क्षितिज पर लाने और भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला रखने में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की भूमिका - Page 177

160 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

‘‘शनिवार की सुबह विचार-विमर्श फिर से प्रारंभ हुआ। प्रांतीय विधायिकाओं में दलित वर्गों को 148 सीटें प्रदान करके सीटों की कुल संख्या के प्रश्न को सुलझा लिया गया, और यह भी निर्णय लिया गया कि केंद्रीय विधायिका में ब्रिटिश इंडिया के हिन्दुओं की सीटों में से 10 प्रतिशत सीटें दलित वर्गों को दी जानी चाहिए। इसके बाद, घंटों तक जनमत संग्रह के प्रश्न पर विचार-विमर्श चलता रहा, जिसने पहले की भांति हल के मार्ग में बाधा खड़ी कर दी थी। चूंकि किसी को भी डॉ. अम्बेडकर की मांग से सहमत होने की उम्मीद नहीं थी, उन्होंने यह उचित समझा कि गाँधी से एक बार फिर से मिल लिया जाए। अतः डॉ. सोलंकी और राजगोपालाचारी को अपने साथ लेकर वे गांधी के पास गए। गाँधी ने अम्बेडकर को बताया कि उनका तर्क अकाट्य है, लेकिन उन्होंने कहा कि मात्र सांविधिक गारंटी से यह बीमारी समाप्त नहीं होगी। अतः उन्होंने डॉ. अम्बेडकर से अनुनय किया कि हिन्दूवाद को अपने पापयुक्त भूत का स्वैच्छिक प्रायश्चित करने के लिए एक अंतिम अवसर दें और यह भी कहा कि जनमत संग्रह होना चाहिए, लेकिन पांच वर्ष से अधिक लंबी अवधि के उपरांत नहीं। गांधी ने अंतिम निर्णय के अंदाज में कहा ‘‘पांच साल या मेरे प्राण।’’

चर्चा स्थल पर लौटते हुए डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि वे जनमत संग्रह की अवधि को लेकर पराजय स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं, उन्होंने दृढ़तापूर्वक कहा दस वर्ष से कम नहीं। तकरीबन एक घंटे के बाद उन्होंने जनमत संग्रह की शर्त को संलग्न किए बिना ही समझौता करने का निर्णय लिया। दोपहर बाद तीन बजे राजगोपालाचारी ने यह सब गाँधी को जेल में स्पष्ट कर दिया। गांधी ने कहा ये बहुत बढि़या है, और अपनी सहमति दे दी। राजागोपालाचारी जल्दी से शिवलाल मोतीलाल के 1, रामकृष्ण भंडारकर रोड स्थित बंगले पर लौट आए और खुशी के माहौल में यह घोषणा की कि गांधी ने समझौते को आशीर्वाद दे दिया है। उन्हें समझौते का मसौदा तैयार करने में कोई समय नहीं लगा। प्रसन्नता, ताजगी तथा गपशप के माहौल में, शनिवार, 24 सितम्बर की शाम को पांच बजे समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, और इतिहास में इसे पूना समझौता के नाम से जाना जाएगा। दलित वर्गों की ओर से डॉ. अम्बेडकर ने इस पर हस्ताक्षर किए और सवर्ण हिन्दुओं की ओर से पंडित मदन मोहन मालवीय ने इस पर हस्ताक्षर किए।’’ ख्1,

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समझौते का पाठ इस प्रकार है :-

(1) प्रांतीय विधायिकाओं की साधारण निर्वाचकमंडल सीटों में से दलित वर्गों के लिए आरक्षित सीटें निम्नानुसार होंगी :

  1. कीर, पृष्ठ 213-214 ।