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पूना समझौते की पुष्टि करने वाले संकल्प के समर्थन में बोलने के लिए जब डॉ. बी. आर. अम्बेडकर खड़े हुए तब करतल ध्वनि से उनका अभिनंदन किया गया। उन्होंने घोषणा की कि :
‘‘मैं मानता हूं कि मेरे लिए यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि अब से कुछ दिन पहले कोई भी व्यक्ति मुझ से अधिक असमंजस की स्थिति में नहीं रहा होगा। मैं एक कठिन परिस्थिति में से गुजर रहा था जहां मुझे दो कठिन अनुकल्पों में से एक को चुनना था।’’
‘‘भारत के सबसे महान व्यक्ति के जीवन को बचाना था। मेरे समक्ष एक समुदाय के हितों के प्रति न्याय करने तथा उनकी रक्षा की समस्या भी थी जिसके लिए मैं अपने दृष्टिकोण के अनुसार गोल मेज सम्मेलन में अपने विनम्र तरीके से प्रयासरत था। मुझे यह कह पाने में खुशी हो रही है कि यह हम सभी के सहयोग से संभव हो सका है और हम महात्मा का जीवन बचाने के लिए एक समाधान की तलाश कर सके हैं तथा भविष्य में ‘‘दलित वर्गों के हितों के यथाआवश्यक संरक्षण के लिए सामंजस्य भी स्थापित कर सके हैं। मेरे विचार से इन सभी बातचीतों के अधिकांश भाग का श्रेय महात्मा गाँधी को जाना चाहिए। मैं यह मानता हूं कि उनसे मिलने पर मैं अत्यधिक चकित रह गया था कि मेरे और उनके बीच कितना कुछ समान है।’’ (करतल ध्वनि)।
‘‘वास्तव में, जब कभी कोई विवाद उनके पास ले जाए गए तो सर तेज बहादुर सप्रू ने आपसे कहा कि उसके पास लाए गए विवाद महत्वपूर्ण किस्म के हैं। मैं हैरान था कि मुझसे लेकर गोल मेज सम्मेलन तक इतने नानाविध विचारों वाला व्यक्ति तुरंत मेरे बचाव के लिए आगे आया न कि दूसरे पक्ष के बचाव में। मैं महात्मा के प्रति बहुत आभारी हूँ कि उन्होंने मुझे कठिन स्थिति में से बाहर निकाला।’’
‘‘मुझे सिर्फ इस बात का खेद है कि महात्मा ने यह दृष्टिकोण गोल मेज सम्मेलन में क्यों नहीं अपनाया? यदि उन्होंने मेरे दृष्टिकोण के प्रति तब इतना महत्व दर्शाया होता तो उन्हें इतनी कठिन परीक्षा से नहीं गुजरना पड़ता। लेकिन ये सब बीते समय की बातें हैं, मुझे खुशी है कि अब मैं यहां इस संकल्प का समर्थन कर रहा हूँ।’’
‘‘समाचार-पत्रों में यह प्रश्न उठाया गया है कि क्या इस समझौते के संपूर्ण ‘‘दलित’’ वर्ग समुदाय का समर्थन मिलेगा, मैं यह स्पष्ट कर दूं कि जहां तक मेरा संबंध है और जहां तक उस दल का संबंध है जिसका मुझे समर्थन मिलता है मुझे विश्वास है कि मैं यहां उपस्थित अन्य मित्रों की ओर से भी बोल रहा हूँ कि हम सभी इस समझौते के साथ हैं। इस बारे में कोई संदेह नहीं होना चाहिए।’’