166 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
‘‘हमारी चिंता यह है कि क्या हिन्दू समुदाय इसका पालन करेगा।’’ (आवाजें : हां, हम करेंगे) ‘‘हम यह महसूस करते है कि दुर्भाग्यवश हिन्दू समुदाय अपने आप में समग्र नहीं है, यदि मैं कहूं तो यह छोटे-छोटे समुदायों का एक महासंघ है। मैं आशा करता हूं और मुझे विश्वास भी है कि हिन्दू अपनी ओर से इस दस्तावेज को अति पवित्र समझेंगे तथा सम्मानजनक भाव से काम करेंगे।’’
‘‘मैं बस एक ही बात कहना चाहूंगा। मैं बातचीत में भाग लेने वाले सभी मित्रों का बहुत आभारी हूँ, लेकिन सर तेज बहादुर सप्रू और श्री सी. राजागोपालाचारी का मैं विशेष रूप से उल्लेख करना चाहूंगा। सर तेज बहादुर के बिना कई बिन्दुओं को संभाल पाना संभवतः कठिन होता। मैं यह मानता हूँ कि गोल मेज सम्मेलन के गत दो वर्षों के दौरान उनके साथ मेरे अनुभव का परिणाम यह रहा है कि यदि भारत में साम्प्रदायिक पूर्वाग्रह से ऊपर उठकर कोई व्यक्ति है तो वह सर तेज बहादुर है। उनकी निष्पक्षता और न्याय उन सभी अल्पसंख्यकों के लिए राहत का विषय रहा है जो नए संविधान में कुछ रक्षोपायों के लिए लालायित रहते हैं।’’
‘‘मैं अपने मित्र राजगोपालाचारी का उल्लेख करना चाहूंगा। जब कभी हम टूटने के कगार पर होते थे, वे हमारे बचाव में आगे आए और उनकी पटुता के बिना संभवतः यह समझौता अस्तित्व में ही नही आता। इन बातचीतों के दौरान उत्तेजित शब्दों के आदान-प्रदान तथा उग्र बहस के समय पंडित मालवीय ने जिस शिष्टाचार और सहिष्णुता का परिचय दिया, उसके लिए मैं उनका भी धन्यवाद करता हूँ।’’
‘‘साम्प्रदायिक अधिनिर्णय में जो परितर्वन किया गया है वह इस दृष्टिकोण पर जोर देने के फलस्वरूप ही संभव हुआ है कि अलग निर्वाचकमंडल प्रणाली राष्ट्रीय हितों के लिए घातक है। मैं मानता हूं कि मैं इस दलील से सहमत नहीं हूं। मैं यह अच्छी तरह से समझता हूं कि बहुमत को प्रतिनिधित्व करने के लिए पृथक निर्वाचकमंडल प्रणाली हानिकारक है, लेकिन मैं फिर भी आश्वस्त नहीं हूँ कि अल्प संख्या। प्रतिनिधित्व के लिए, अलग निर्वाचकमंडल एक बुराई है।’’
‘‘मैं नहीं मानता कि हिन्दू समुदाय में दलित वर्गों’’ का विलय करने की समस्या के लिए संयुक्त निर्वाचकमंडल प्रणाली अंतिम हल होने जा रही है।’’
‘‘मेरा मानना है कि कोई भी निर्वाचन व्यवस्था किसी बड़ी सामाजिक समस्या का हल नहीं हो सकती। इसके लिए किसी राजनीतिक व्यवस्था से भी अधिक की आवश्कता होती है और मैं आशा करता हूँ कि हम आज जो राजनीतिक व्यवस्था कर रहे हैं उससे भी अधिक कर पाना आपके लिए संभव होगा। आप ऐसे तौर-तरीके