खण्ड - III अछूतों को भारत के राजनीतिक क्षितिज पर लाने और भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला रखने में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की भूमिका - Page 184

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तैयार कर सकेंगे जिनकी मदद से दलित वर्गों के लिए न केवल हिन्दू समुदाय का अभिन्न अंग बन पाना संभव होगा बल्कि वे एक सम्मानित स्थान अर्थात् समुदाय में बराबरी का दर्जा भी पा सकेंगे।’’’

‘‘अभी तक ‘‘दलित वर्गों’’ को एक अज्ञानियों के ढेर के रूप में देखा जाता था जिनमें आत्मसम्मान की कोई भावना नहीं थी, हिन्दू कानून में जो सामाजिक दर्जा उन्हें दिया जाता था उसे स्वीकार करना उनके लिए संभव था, लेकिन जैसे-जैसे वे शिक्षित होंगे वे इन सामाजिक कानूनों के अंतर्गत सुव्यवस्थित होने लगेंगे और उनका हिन्दू समाज से अलग हो जाने का बहुत बड़ा खतरा है। मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आप इसे ध्यान में रखें और मैं यह भी आशा करता हूं कि आप इस मामले में आवश्यक कार्रवाई करेंगे।’’

राय बहादुर एम.सी. राजा ने भी संकल्प का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने सवर्ण हिन्दू के हृदय परिवर्तन को साफ-साफ देखा है और इसीलिए वे इस समझौते का समर्थन कर रहे हैं। उन्हें इस बारे में कदापि कोई संदेह नहीं है कि इस समझौते को देश के ‘‘दलित वर्गों’’ के लोगों का खूब समर्थन मिलेगा।

श्री सी. राजगोपालाचारी ने अध्यक्ष के प्रति धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया।

पंडित मालवीय ने घोषणा की कि मालाबार के गुरूवयूर मंदिर में ‘‘दलित वर्गों’’ को प्रवेश दिलाने के अधिकार को लेकर केलप्पन ने अनशन की जो घोषणा की है उसके बारे में मैं महात्मा गांधी से बात करूंगा।

रविवार को आयोजित हिन्दू नेताओं के सम्मेलन में उपस्थित लोगों में शामिल थे। सर तेज बहादुर सप्रू, सर लल्लूभाई समालदास, सर पुरुषोतमदास ठाकुरदास, सर चुन्नीलाल मेहता, सर गोविंद मडगावकर, श्री एम. आर. जयकर, पंडित हृदयनाथ कुंजुरू, श्री जी. के. देवधर, श्री बी.एन. करांजिया श्री के. नटराजन, राय बहादुर एम. सी. राजा, डॉ. अम्बेडकर, श्री पी. बालू, श्रीमती डी. जी. दलवी, कुमारी नटराजन, श्रीमती हंसा मेहता, श्रीमती अवन्तिकाबाई गोखले, श्री बी. एस. कामत, श्री मनू सूबेदार, श्री जी. डी. बिड़ला, श्री डी. पी. खैतान, श्री बी. एफ. भरूचा, डॉ. सोलंकी, डॉ. चौतराम गिडवानी, लेडी चिमनलाल सीतलवाड़, श्री वालचंद हीराचंद, श्री बी. जे. देवरूखकर, श्री सी. राजगोपालाचारी, श्री देवदास गांधी, श्री टी. प्रकाशम और बाबू राजेन्द्र प्रसाद।’’ ख्1,

26 सितम्बर, 1932 को महामहिम सम्राटकी सरकार ने घोषणा की कि वह पूना

  1. दि बंबई क्रानिकल, दिनांक 26 सितम्बर, 1932।