168 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
समझौते पर अनुमोदन प्रदान करने के लिए संसद से सिफारिश करेगी।
सोमवार 26 सितम्बर, 1932 को माननीय श्री एच. जी. हैग, गृह मंत्री ने केंद्रीय विधायिका में अपना व्यक्तव्य दिया :
साम्प्रदायिक अधिनिर्णय के बारे में वक्तव्य। ‘‘माननीय महोदय, सी. पी. रामास्वामी (सदन के नेता), महोदय, क्या आप मुझे यह अनुरोध करने की अनुमति प्रदान करेंगे कि प्रश्नकाल की सामान्य प्रथा से हटकर कार्रवाई की जाए, क्योंकि मेरे माननीय साथी गृह मंत्री को एक अति महत्वपूर्ण वक्तव्य देना है, और मुझे विश्वास है कि जब आप इस वक्तव्य को सुनेंगे तो यह मानेंगे कि सदन की प्रथा को तोड़ना उचित ही था। क्या आप हमें ऐसा करने की अनुमति देंगे?’’
अध्यक्ष महोदय (माननीय महोदय सर इब्राहिम रहीमतुल्ला) :
‘‘क्या वक्तव्य है?’’
माननीय महोदय सर सी.पी. रामास्वामी अय्यर : ‘‘माननीय गृह मंत्री साम्प्रदायिक अधिनिर्णय और दलित वर्गों के बारे में साम्प्रदायिक अधिनिर्णय के संबंध में महामहिम सम्राट की सरकार के निर्णय के बारे में वक्तव्य देना चाहते हैं।’’
अध्यक्ष महोदय (माननीय महोदय इब्राहिम रहीमतुल्ला) : ‘‘एक विशेष मामले के रूप में, अध्यक्ष इस समय वक्तव्य देने की अनुमति देंगे।’’
माननीय श्री एच. जी. हैग (गृह मंत्री) : महोदय, आपकी अनुमति के अनुसरण में, मैं इस सदन के समक्ष आज प्रातः महामहिम सम्राट की सरकार द्वारा जारी वक्तव्य को पढ़ना चाहूंगा जो शनिवार दोपहर बाद पूना में हुए समझौते के बारे में है। महामहिम सम्राट की सरकार के लिए यह अत्यंत संतोष का विषय है कि दलित वर्गों के नेताओं और शेष हिन्दू समुदाय के बीच एक समझौता हुआ है जो नई विधायिकाओं में दलित वर्गों के प्रतिनिधित्व तथा उनके कल्याण से जुड़े अन्य मामलों के बारे में है। गत 4 अगस्त के सरकार के साम्प्रदायिक अधिनिर्णय में निहित विशेष दलित वर्ग निर्वाचन-क्षेत्रों के साथ-साथ साधारण निर्वाचन-क्षेत्रों की प्रणाली के स्थान पर, समझौते में साधारण निर्वाचन-क्षेत्रों की व्यवस्था की गई है जिनमें से दलित वर्गों के लिए सीटें आरक्षित हैं जो आरक्षित सीटों को भरने की महत्वपूर्ण शर्तों पर निर्भर करेगा। सरकार ने अपने अधिनिर्णय में, जो समुदायों के बीच समझौते से पहले दिया गया था, दलित वर्गों के प्रति अपनी चिंता व्यक्त की थी ताकि नई विधायिकाओं द्व ारा इन वर्गों के हितों को सुरक्षा प्रदान की जा सके। दलित वर्गों और अन्य हिन्दुओं के प्रतिनिधियों ने मिलकर काम किया है तथा उनका यह मानना है कि अब उन्होंने