खण्ड - III अछूतों को भारत के राजनीतिक क्षितिज पर लाने और भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला रखने में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की भूमिका - Page 186

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महामहिम सम्राट को जो स्कीम भिजवाई है वह इस प्रयोजनार्थ पर्याप्त है, सरकार अपने अधिनिर्णय के पैरा 4 में दिए गए उपबंध के स्थान पर प्रांतीय विधायिकाओं में प्रतिनिधित्व के बारे में समझौते के खंडों को अपनाने के लिए अनुरोध करेगी।’’ (करतल ध्वनि)।

‘‘यह समझा जा सकता है कि प्रत्येक प्रांत में समझौते के अंतर्गत दलित वर्गों के लिए आरक्षित सीटों सहित साधारण सीटों की कुल संख्या वही रहेगी जो साधारण सीटों और महामहिम सम्राट की सरकार के निर्णय के अंतर्गत दलित वर्गों के लिए विशेष सीटों को जोड़ कर बैठती हैं।’’

‘‘महामहिम सम्राट की सरकार ने देखा है कि इस समझौते में कुछ ऐसे प्रश्न भी शामिल हैं जो 4 अगस्त के उनके अधिनिर्णय के दायरे से बाहर हैं। खंड 8 और 9 सामान्य बिन्दुओं के बारे में हैं जिनका कार्यान्वयन संभवतः प्रमुख रूप से संविधान के वास्तविक प्रचालन पर निर्भर करेगा। लेकिन महामहिम सम्राट की सरकार इन

खंडों को हिन्दुओं के दलित वर्गों के प्रति सवर्ण इरादों को एक निश्चित शपथ के रूप में देखती है।’’

‘‘सरकार के अधिनिर्णय के दायरे के बाहर के दो अन्य बिन्दु हैं :

(1) समझौते में अनुध्यात है कि दलित वर्गों का मताधिकार वही होगा जिसकी सिफारिश मताधिकार (लार्ड लोथियान) समिति करेगी। स्पष्ट है कि दलित वर्गों के लिए मताधिकार के स्तर (और वास्तव में सामान्यतः हिन्दुओं के लिए) का निर्धारण तभी किया जाना चाहिए जब अन्य समुदायों के लिए किया जा रहा हो, तथा यह पूरा विषय महामहिम सम्राट की सरकार के विचाराधीन हो। (2) समझौते में केंद्रीय विधायिका के लिए दलित वर्गों के प्रतिनिधियों का चुनाव करने हेतु एक विशेष पद्धति भी शामिल है। यह भी अधिनिर्णय से बाहर का विषय है और जिसकी केंद्र की विधायिका के लिए चुनाव हेतु समग्रता के एक भाग रूप। जांच-पड़ताल की जा रही है तथा टुकड़ों में कोई भी निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इन दो बिन्दुओं के बारे में जो कुछ भी कहा गया है उससे यह अर्थ नहीं निकालना चाहिए कि महामहिम सम्राट की सरकार समझौते में जो कुछ भी कहा गया है उससे सहमत नहीं है, बल्कि यह कि ये दोनों बिन्दु अभी विचाराधीन हैं। इस गलतफहमी से बचने के लिए, यह स्पष्ट किया जाता है कि दलित वर्गों और अन्य हिन्दुओं के बीच समझौता करने के लिए सरकार। ब्रिटिश इंडिया सामान्य सीटों की प्रतिशतता के लिए 18 प्रतिशत को ठीक मानती है।’’ (करतल ध्वनि) [1]

  1. गोल मेज कांफ्रेंस और पूना समझौते पर टिप्पणियों हेतु - परिषिष्ट 5 देखिए।