खण्ड - IV कालाराम मन्दिर प्रवेश सत्याग्रह, नासिक और मन्दिर प्रवेश आन्दोलन - Page 194

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हिन्दुओं के उपद्रवी तत्त्वों के साथ उनका झगड़ा हो गया और सवर्ण हिन्दू गुप्त योजना के अनुसार दोनों तरफ से संकरी, पेचीली और असुविधाजनक गली के रास्ते से रथ को लेकर भाग गए। उस गली के मुहाने पर सशस्त्र पुलिस का पहरा था। काद्रेकर नामक एक साहसी भंडारी युवक ने सशस्त्र पुलिस की सुरक्षा पंक्ति तोड़ दी जो गोलीबारी के आदेश का इंतजार कर रहे थे तथा एक पल में अछूतों की भीड़ पत्थरों की बौछार के बीच रथ तक पहॅुंँचने और उसे कब्जाने में सफल हो गई।

खतरनाक रूप से घायल काद्रेकर खून में लथपथ होकर गिर पड़ा। डॉ. अम्बेडकर के आदमी उन्हें सुरक्षा प्रदान कर रहे थे और जब उन्हें सुरक्षा देने वाले व्यक्ति की छतरी छितराई तो डॉ. अम्बेडकर को भी हल्की चोट लग गई। सारे शहर में अछूतों और सवर्ण हिन्दुओं के समूहों के बीच खुली झड़पें हुईं।

इस सत्याग्रह से पूरे जिले के रूढि़वादी हिन्दुओं के मन में द्वेष की भावना भर गई। इस तनाव के चलते अस्पृश्यों के बच्चों को स्कूलों से बाहर निकाल दिया गया, उनके लिये सड़कें बंद कर दी गईं और बाज़ार में उन्हें रोज़मर्रा की जरूरी चीज़ें देने से मना कर दिया गया, क्योंकि वे अन्य हिन्दुओं के समान अधिकारों की माँग कर रहे थे। कई गांवों में अस्पृश्यों के साथ बुरा व्यवहार किया गया। इन मुसीबतों के बावजूद भी नासिक में संघंर्ष जारी रहा। दोनों ही पक्षों को समझाकर किसी समझौते पर पहुँचने के प्रयास किये जा रहे थे। डॉ. मूँजे तथा डॉ. कुर्ताकोटि (शंकराचार्य) किसी नतीजे पर पहुँचने का प्रयास कर रहे थे। वर्ष 1930 में अप्रैल के मध्य में महान करोड़पति बिरला ने भी डॉ. अम्बेडकर से बम्बई में मुलाकात की। लेकिन दलित वर्गों का संकल्प इतना दृढ़ था कि रूढि़वादी हिन्दुओं को प्रसिद्ध मंदिर पूरे साल भर बंद रखना पड़ा और संघंर्ष चलता रहा।’’ ख्1,

डॉ. अम्बेडकर ने, नासिक में कलाराम मंदिर प्रवेश सत्याग्रह के दौरान अफसरशाही द्वारा पैदा की गई समस्याओं के संबंध में बम्बई के महामहिम राज्यपाल को दो पत्र लिखे थे।

ये पत्र इस प्रकार हैं : संपादक

भीमराव आर. अम्बेडकर, दामोदर हॉल,

एम.ए., पीएच.डी., डी.एससी. परेल,

बार-एट-लॉ, बम्बई-12

सदस्य, विधान परिषद, 24 मार्च, 1930

बम्बई

महामहिम का अभिवादन,

  1. कीर, पृष्ठ 137-138।