खण्ड - IV कालाराम मन्दिर प्रवेश सत्याग्रह, नासिक और मन्दिर प्रवेश आन्दोलन - Page 195

178 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

मेरे तार के जवाब में 13 मार्च, 1930 के पत्र के लिये मैं महामहिम का अत्यंत आभारी हूँ, जिसमें आपने स्पृश्यों तथा अस्पृश्यों के बीच विवाद, जिसका केन्द्र ना­ सिक के कलाराम मंदिर में चल रहा सत्याग्रह है, पर सरकार द्वारा निष्पक्षता से कार्रवाई किये जाने का आश्वासन दिया है। मैं महामहिम का ध्यान हाल ही में हुई एक घटना की ओर आकर्षित करना चाहूँगा, जिससे निबटना बेहद खतरनाक लगता है। जिस दिन सत्याग्रह शुरू हुआ था, हमने जानबूझकर मंदिर के पुजारी के घर के प्रवेश द्वार का रास्ता नहीं रोका, यह सोचकर कि मंदिर में प्रवेश करने और देव-दर्शन पाने के लिये यह रास्ता जनता द्वारा प्रयोग नहीं किया जायेगा। लेकिन पिछले कुछ समय से यह प्रवेश द्वार सार्वजनिक रास्ता बन चुका है और नासिक की जनता मंदिर में प्रवेश करने के लिये इस रास्ते का प्रयोग कर रही है। यदि इसकी अनुमति दी जायेगी, तो इससे सत्याग्रह का मूल उद्देश्य पूरी तरह से निरर्थक हो जायेगा। इसे रोकने के लिये, सत्याग्रह समिति इस प्रश्न पर और आम जनता के लिये निजी प्रवेश द्वार को बंद करने और केवल पुजारी के परिवार के सदस्यों को यहाँ से गुजरने की अनुमति देने के अपने इरादे पर चर्चा करने के उद्देश्य से जिला पुलिस अधीक्षक तथा जिला मजिस्ट्रेट के पास गई। परन्तु, जिला मजिस्ट्रेट ने सत्याग्रह समिति के सदस्यों से मिलने से इनकार कर दिया और उन्हें एक चिट देकर वापस भेज दिया जिस पर लिखा था कि वे उन्हें हटा देंगे जो पुजारी के द्वार पर सत्याग्रह करेंगे। मै यह नहीं कहूँगा कि जिला अधिकारी का इस तरह का आचार विवेकपूर्ण है या नहीं। जिस बात की तरफ मैं महामहिम का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ, वह यह है कि यदि कलैक्टर का यही रवैया रहा तो इससे तुरंत ही सरकार तथा दलित वर्गों के बीच टकराव पैदा हो जायेगा। हमारा वास्तविक विवाद स्पृश्य हिन्दुओं से है और मैं ऐसी हर परिस्थिति को नज़रअंदाज कर रहा हूँ, जिससे स्पृश्य हिन्दू एक तरफ छूट जायें और सत्याग्रह सरकार और दलित वर्गों के बीच का मामला हो जाये। वास्तव में, यह तो सत्याग्रहियों के मोर्चाबंदी के बाहर

खड़े रहने के लिये कहने से इनकार करके और उन्हें मंदिर के द्वार के साथ बैठाने के लिये पुलिस-सुरक्षाकर्मियों के बीच से ज़बरदस्ती निकालकर हम पहले दिन ही कर सकते थे। हमने ऐसा नहीं किया सिर्फ इसलिये कि हम इसे अपने और सरकार के बीच की लड़ाई नहीं बनाना चाहते थे। लेकिन, यदि सरकार पुजारी को अपना निजी प्रवेश-द्वार आम रास्ते के रूप में प्रयोग करने की अनुमति देती है और इस तरह हमारे उद्देश्य को निष्फल करने में एक पक्ष को उनके निष्पक्ष रहने के अपने मूल इरादे से मुकरती है, तो यह अपरिहार्य हो जायेगा। हम किसी भी स्थिति में पुजारी को यह नया स्टंट अपनाने की अनुमति नहीं दे सकते और उसका इस तरह हमारे सत्याग्रह को निरर्थक करना बदार्श्त नहीं कर सकते, चाहे इससे हमारे और