182 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
मेरी शिकायत सिपाहियों के विरुद्ध है, जिन्होंने पक्षपात किया और जिन्होंने बेहद मनमाने ढंग से आदरणीय अस्पृश्यों पर हमला करके अपने जातिवाद का प्रदर्शन किया। इनके नाम तथा नम्बर इनके वरिष्ठ अधिकारियों को दे दिये जायेंगे और मुझे विश्वास है कि महामहिम उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई के निर्देश देंगे।
जिला मजिस्ट्रेट की नीति :- मुझे यह कहने का दुख है कि अस्पृश्यों के सत्याग्रह के संबंध में जिला मजिस्ट्रेट की नीति से मैं संतुष्ट नहीं था। अपने पिछले पत्र में मैंने महामहिम को सूचित किया था कि किस तरह पुजारी के घर का एक निजी द्वार जनता द्वारा मंदिर में प्रवेश पाने के लिये प्रयोग किया जा रहा है और इस प्रकार कैसे हमारा सत्याग्रह निष्फल किया जा रहा है।
जिला मजिस्ट्रेट ने हमारे तर्क को कोई महत्व नहीं दिया और रामनवमी के दिन, हमारे तर्क को पूरी तरह से नज़रअंदाज करते हुये, न केवल पुजारी के निजी प्रवेश- द्वार को सार्वजनिक रूप से प्रयोग करने की अनुमति दी, बल्कि हमारे सत्याग्रहियों को बराबर वाले सार्वजनिक रास्ते पर रोज़ाना की तरह बैठने से रोक दिया। निजी द्वार से मंदिर में प्रवेश पा रहे स्पृश्यों को बाहर निकलने का रास्ता देने हेतु इस रास्ते पर से बैरिकेड हटा दिया गया था। परिणामस्वरूप, सत्याग्रह पर बैठे 300 अस्पृश्यों में से 18 को रामनवमी के दिन गिरफ्तार कर लिया गया।
9 तारीख को हुए दंगे के बाद जिला मजिस्ट्रेट ने मुझसे कहा कि मैं सत्याग्रह रोक दूँ वरना वे पुलिस हटा देंगे। उनके प्रस्ताव पर सत्याग्रह समिति द्वारा विचार किया गया और इसे अस्वीकार कर दिया गया जो कि मैं समझता हूँ, बिल्कुल सही हुआ। अस्पृश्यों के आंदोलन के लिये सत्याग्रह को इस मुकाम पर पहुँचा कर रोकने से बड़ा और कोई अनर्थ नहीं हो सकता था। स्पृश्य हिन्दुओं को यह संकेत मिल जायेगा कि ज़रा सा बल-प्रयोग अस्पृश्यों के किसी भी आंदोलन को कुचलने के लिये पर्याप्त है।
मैं और सत्याग्रह समिति इस परिस्थिति में इस तरह का कोई संकेत नहीं देना चाहते। अगर किसी और वजह से नहीं, तो केवल इसी वजह से भी हम अपना सत्याग्रह जारी रखेंगे। जहाँ तक पुलिस हटाने का सवाल है, तो मैं चाहूँगा कि बम्बई सरकार इसके परिणामों को अच्छी तरह से समझ ले।
मेरी समझ से इसका अर्थ यह हुआ कि सरकार उन लोगों की मदद के लिये अपनी शक्तियों का प्रयोग नहीं करना चाहती, जो अपने अधिकार प्राप्त करने के लिये संघर्ष कर रहे हैं। ऐसी शक्ति किसी काम की नहीं और दलित वर्गों के लिये फिर उन्हीं के साथ मिल जाना औचित्यपूर्ण होगा, जो बदलाव की बात कर रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि बम्बई सरकार जिला मजिस्ट्रेट को इस संबंध में उचित निर्देश देगी।