खण्ड - IV कालाराम मन्दिर प्रवेश सत्याग्रह, नासिक और मन्दिर प्रवेश आन्दोलन - Page 200

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आज के ’टाईम्स ऑफ़ इंडिया’ से मुझे मालूम हुआ कि जिला मजिस्ट्रेट ने सी. आर.पी.सी. (दंड प्रक्रिया संहिता) की धारा 144 के तहत आदेश जारी किया है और लोगों के कलाराम मंदिर के नज़दीक आने पर रोक लगाई है। मैं नहीं जानता कि क्या इस आदेश का प्रयोजन हमारे सत्याग्रहियों को मंदिर के दरवाजे पर बैठने से रोकना है, जैसा कि वे अब तक करते आ रहे हैं।

मैं अत्यधिक आदर के साथ महामहिम को बताना चाहूँगा कि इस आदेश का सम्मान किये जाने की संभावना (मैं जान-बूझकर इस शब्द का प्रयोग कर रहा हूँ, क्योंकि मैं सत्याग्रह समिति के दृष्टिकोण के विषय में नहीं जानता) केवल तभी है, जब जिला मजिस्ट्रेट यह आश्वासन दें कि मंदिर के द्वार इस आदेश में उल्लिखित अवधि तक बंद रहेंगे और पुजारी के घर का निजी प्रवेश-द्वार आम जनता के लिये नहीं खुलेगा।

जैसा कि मैंने अपने पिछले पत्र में स्पष्ट किया था, यह लड़ाई स्पृश्यों तथा अस्पृश्यों के बीच की है और इसे सरकार और अस्पृश्यां के बीच का विवाद बनाने की मेरी कोई इच्छा नहीं है।

इस स्थिति पर व्यक्तिगत रूप से चर्चा करने हेतु मैं महामहिम से साक्षात्कार करने का इच्छुक हूँ और यदि महामहिम इसके लिये तैयार हैं, तो मैं कल दोपहर 2 बजे तक साक्षात्कार के लिये उपलब्ध हूँ।

महामहिम से जल्दी जवाब पाने का आकांक्षी,

महामहिम का सर्वाधिक आज्ञाकारी

ह./बी.आर. अम्बेडकर” ख्1,

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“अपने प्रयासों से आज़ादी हासिल करो”

त्रिचूर के लोगों को डॉ. अम्बेडकर की सलाह

कालीकट, 17 जून, 1931

बम्बई के डॉ. अम्बेडकर ने, मंदिर प्रवेश सत्याग्रह त्रिचूर के आयोजक, को लिखे एक पत्र में कहा है, “मैं आपको सलाह दूँगा कि काँग्रेस की मदद पर निर्भर न रहें। वह इस मामले में आपकी मदद नहीं करेगी। इसकी मदद आपके उद्देश्य में किसी तरह सहायक नहीं होगी। मैं चाहता हूँ कि हमारे लोग अपने प्रयासों से आज़ादी हासिल करें।” ख्2,

1.2. खेरमोड, खंड 3 पृष्ठ 323-328। द बॉम्बे क्रॉनिकल, 18 जून, 1931।