खण्ड - IV कालाराम मन्दिर प्रवेश सत्याग्रह, नासिक और मन्दिर प्रवेश आन्दोलन - Page 201

184 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

डॉ. अम्बेडकर की सलाह

डॉ. अम्बेडकर की ओर से इससे अधिक स्वाभाविक और कोई सलाह नहीं हो सकती कि त्रिचूर के मंदिर प्रवेश सत्याग्रह के संयोजक अपने अभियान में काँग्रेस की मदद न लें। अन्यथा काँग्रेस के मिथ्या निरूपण का कार्य और भी कठिन हो जायेगा। और दूसरे, किसी से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह अपना ‘उद्देश्य’ ही सौंप दे। डॉ. अम्बेडकर का पत्र अस्तित्व के लिये एक बिल्कुल स्पष्ट संघर्ष से अधिक कुछ भी नहीं है।

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नासिक सत्याग्रहियों को लंदन से आशीर्वाद

बम्बई, 2 नवम्बर, 1931

नासिक मंदिर प्रवेश सत्याग्रह समिति के महासचिव को डॉ. अम्बेडकर की ओर से लंदन से निम्न संदेश प्राप्त हुआ हैः-

“मुझे बेहद अफसोस है कि मैं तुम्हारे कुछ समय पहले भेजे गये उस पत्र का जवाब न दे सका, जिसमें तुम्हारे और आयुक्त (कमिश्नर) के बीच हुए साक्षात्कार का उल्लेख था। मैं अल्पसंख्यकों के प्रश्न में इतना उलझा रहा हूँ, जो कि आप जानते ही हैं कि श्री गांधी के रवैये के चलते और भी ज्यादा कठिन हो गया है, और मेरे पास एक मिनट भी नहीं था।

जैसा कि तुम्हारा अनुमान था, मुझे भी कमिश्नर सी.डी. से एक पत्र मिला था, जिसमें मुझे लोगों को नासिक सत्याग्रह बंद करने की सलाह देने को कहा गया था। मैंने अभी तक उस पत्र का जवाब नहीं दिया है, लेकिन मैं अब देने वाला हूँ। मैं उन्हें बताने वाला हूँ कि हम रुक नहीं सकते। इसलिये तुम हमारे लोगों से सत्याग्रह जारी रखने को कह सकते हो। हम सरकार से आदेश प्राप्त नहीं करेंगे, ठीक वैसे ही, जैसे हम रूढि़वादी हिन्दुओं से आदेश नहीं लेंगे।

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हमने काफ़ी समय तक सरकार का भरोसा कर लिया

हमने “अस्पृश्यता” मिटाने के लिये सरकार पर काफी समय तक भरोसा किया है। लेकिन उसने इस मामले में कुछ करने के लिये अपनी अँगुली तक नहीं हिलाई है और उसे हमें रुकने के लिये कहने का कोई अधिकार नहीं है। हमें यह बोझ अपने ही कंधों पर लेना होगा और किसी भी कीमत पर इस अत्याचार से स्वयं को