खण्ड - IV कालाराम मन्दिर प्रवेश सत्याग्रह, नासिक और मन्दिर प्रवेश आन्दोलन - Page 204

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जिसे वायसराय ने इस शर्त पर केंद्रीय विधानमंडल में पेश करने की अनुमति दे दी कि योग्यताएँं उनके पूर्वगामी विधेयक के समान ही रहनी चाहिएँ।

महामहिम वायसराय लॉर्ड विलिंग्टन इस शर्त पर इसे केन्द्रीय विधानमंडल में प्रस्तुत करने पर सहमत हुए कि भारत की सरकार इसके सिद्धांतों को स्वीकार करने के लिये वचनबद्ध नहीं है और हिन्दू समुदाय के हर वर्ग को इसके प्रावधानों पर अपना दृष्टिकोण व्यक्त करने का अवसर दिया जायेगा। महात्मा गांधी ने 1 फरवरी, 1933 को वायसराय को पत्र लिखकर निवेदन किया कि 25 सितम्बर, 1932 को बम्बई में सवर्ण हिन्दुओं द्वारा पास किये गये प्रस्ताव, जो पूना संधि का हिस्सा है, के चलते भारत सरकार इन दो वैधानिक उपायों को समर्थन देने के लिये प्रतिबद्ध है।

महात्मा गांधी का मानना था कि रंगा अय्यर के विधेयक का सभी को समर्थन करना चाहिये। उन्होंने केन्द्रीय विधान मंडल के हिन्दू सदस्यों से अपील की। उन्होंने सी. राजगोपालाचारी की सेवाओं का प्रयोग किया जो उनके अनुसार विधेयकों के लिये समर्थन जुटाने हेतु ‘एक बेहतर प्रचारक’ थे। गांधी जी ने उन्हें सलाह दी कि “डॉ. अम्बेडकर के विस्फोट, सरकार के फैसले और मालवीय के विरोध” को दिल पर न लगाएँ। जी.डी. बिरला और देवदास गांधी को विधेयकों के लिये समर्थन के प्रचार हेतु नियुक्त किया गया। जब विधेयक चयन समिति की नियुक्ति की अवस्था तक पहुँच चुका था, तब ब्रिटिश सरकार ने विधानसभा भंग करके चुनाव के आदेश दे दिये। अपने निर्वाचनमंडलों का सामना करने के विचार से भयभीत विधेयक के पक्षधर सदस्यों ने अचानक अपने मत बदल दिये। विधेयक को पेश करने वाले रंगा अय्यर को गहरा आघात लगा और उन्होंने सी. गोपालाचारी को यह कहकर फटकार लगाई कि वे “कर्कट की तरह” अपनी बात से फिर गये हैं। उन्होंने कहा, “यदि वे मंदिर-प्रवेश विधेयक या अस्पृश्यों के मुद्दों का समर्थन करते, तो उनके कई वोट मारे जाते, क्यांंकि यह लोकप्रिय मुद्दे नहीं हैं और इसलिये वे मैदान छोड़कर भाग गये हैं और विधानसभा में जितनी बड़ी संख्या के साथ संभव हो, वापस आने के लिये हर चाल चल रहे हैं।”

इस पृष्ठभूमि में 4 फरवरी, 1933 को दो महान नेताओं-महात्मा गांधी तथा बाबा साहेब अम्बेडकर ने यरवदा जेल में मुलाकात की।

(डॉ. अम्बेडकर और गांधी जी के बीच हुई बैठकों के विसतृत विवरण के लिये “डॉ. अम्बेडकर- महात्मा गांधी मीटिंग्स” शीर्षक के अंतर्गत भाग II देखें-संपादक)

इस मुलाक़ात के बाद डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने एक वक्तव्य जारी किया, जिसमें उन्होंने मंदिर-प्रवेश विधेयक के संबंध में अपने विचार व्यक्त किये। वह वक्तव्य इस प्रकार है :