खण्ड - I महाड सत्याग्रह पानी के लिए नहीं, बलिकु मानवाधिकारों की स्थापना के लिए - Page 21

4 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

डॉ. अम्बेडकर, अर्द्ध-नग्न, व्याकुल और उत्सुक स्त्री-पुरूषों अपना अध्यक्षीय भाषण देने के लिए खड़े हुए और उन्होंने उसे सरल, छोटे और ओजस्वी वाक्यों से आरंभ किया। अपनी आवाज में एक अनोखी उत्तेजना के साथ उन्होंने दापोली, जहाँ उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा पाई थी, की स्थितियों का वर्णन किया और कहा कि वे उस स्थान की ओर आकर्षित हुए थे जहां उन्होंने अपना बचपन बिताया था तथा उसके आसपास के रमणीय प्राकृतिक दृश्य से ऐसे स्थान के लिए उसका प्यार और भी बढ़ गया था। उन्होंने अपने बचपन के दिन याद किए और कहा ””एक समय ऐसा था जब हम, जिनकी अछूतों के रूप में निंदा की जाती है, उच्च वर्गों से भिन्न अन्य समुदायों की तुलना में शिक्षा में बहुत उन्नत थे, बहुत आगे थे। उस समय देश का यह भाग हमारे लोगों के कार्य और प्रभाव से स्पन्दित हो रहा था।”

तत्पश्चात, उन्होंने अपने लोगों को बड़ी उत्सुकतापूर्वक एक संदेश दिया जिसकी गूंज पूरे महाराष्ट्र की पहाडि़यों, घाटियों और गांवों में सुनाई दी। यह घोषित करते हुए कि विसैन्यीकरण उनके पतन के कारणों में से एक कारण था, उन्होंने कहा ”सेना ने हमें अपने जीवन-स्तर को ऊंचा उठाने तथा सेना अधिकारियों के रूप में अपनी योग्यता, प्रज्ञा-साहस और कुशाग्रता सिद्ध करने के अद्वितीय अवसर प्रदान किए। उन दिनों अछूत भी सैनिक स्कूलों के प्रधानाध्यापक हो सकते थे और सैनिक शिविरों में अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा बहुत कारगर और हितकारी थी।” ”उन्होंने आगे कहा,” ”अंग्रेजों की ओर से उन अछूतों के लिए सेना के दरवाजे बंद करना, जिन्होंने भारतीय साम्राज्य स्थापित करने में उस समय उनकी मदद की जिस समय उनकी इंग्लैंड की सरकार नेपोलियन युद्ध के दौरान फ्रांसीसियों की जकड़ में थी, विश्वासघात और धोखे से कम नहीं था।”

इसके बाद उन्होंने प्रेरक स्वर में कहा, ”जब तक हम शुद्धिकरण की तिहरी प्रक्रिया पूरी नहीं कर लेते, तब तक स्थायी उन्नति नहीं की जा सकती। हमें अपने आचरण में सुधार करना चाहिए, अपने उच्चारणों को फिर से ठीक करना चाहिए और अपने विचारों को पुनः दृढ़ता प्रदान करनी चाहिए। अतः, मैं अब आपसे यह चाहता हूं कि आप प्रतिज्ञा करें कि आप इस क्षण से सड़ा-गला मांस खाना छोड़ देंगे। समय आ गया है हम अपने मन से ऊंच-नीच के विचार त्याग दें। अब फेंके हुए टुकड़ों को न खाने का संकल्प करें। हमारी आत्म-उन्नति केवल तभी होगी जब हम स्वावलम्बन सीख जाएंगे, अपना आत्म-ज्ञान प्राप्त कर लेंगे और आत्म-सम्मान पुनः प्राप्त कर लेंगे’’। उन्होंने अपने लोगों से यह भी आग्रह किया कि वे सेना, नौसेना और पुलिस में उनके प्रवेश पर लगे सरकारी प्रतिबंध के विरुद्ध आंदोलन करें तथा उन्हें सरकारी नौकरियों में प्रवेश करने और शिक्षा पाने का महत्व बताया।