2. मूर्ति की बजाय सार्वजनिक पुस्तकालय सर मेहता का सर्वोत्तम स्मारक होगा। - Page 224

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प्रतिमा के स्थान पर एक सार्वजनिक पुस्तकालय होगा
सर मेहता का सबसे अच्छा स्मारक

‘‘यह डॉ. अम्बेडकर द्वारा प्रकाशन के लिये भेजा गया पहला पत्र है, जो उन्होंने सन् 1916 में कोलम्बिया यूनिवर्सिटी, न्यूयॉर्क, अमरीका में पढ़ते हुए भेजा था। बम्बई में म्यूनिसिपल ऑफिस के बाहर सर फीरोज़शाह मेहता की प्रतिमा बनाये जाने का प्रस्ताव रखा जा रहा था। अख़बारों के ज़रिये यह जानकर डॉ. अम्बेडकर को लगा कि एक महान आदमी के स्मारक का यह बिल्कुल तुच्छ रूप होगा। उनके अनुसार स्मारक की सामाजिक उपयोगिता होनी चाहिये, विशेषकर ज्ञान के प्रसार के लिये। इसलिये उन्होंने सर फी़रोजशाह मेहता के स्मारक के रूप में एक सार्वजनिक पुस्तकालय बनाने का प्रस्ताव रखा। यह पत्र उन भारतीयों के लिये आज भी शिक्षाप्रद और मार्गर्शक हो सकता है, जिन्हें महान हस्तियों की प्रतिमायें खड़ी करने की सनक है।“ ख्1,

“स्वर्गीय सर फ़ीरोजशाह मेहता

सेवा में,

संपादक

द क्रॉनिकल

महोदय,

आप मुझसे सहमत होंगे कि भारत जैसे देश में, जिसकी सामाजिक, आर्थिक और राजनीकि स्थिति इतनी खराब है, सबसे अधिक आवश्यकता ईमानदार नेताओं की है, जो पुनरुद्धार का व्यापक कार्य करने का जिम्मा उठा सकें। स्वर्गीय श्री गोखले तथा पी.एम. मेहता ऐसे ही नेता थे, दोनों ही अपने उस उत्साह तथा बलिदान के लिये चिरस्थायी आदर के हक़दार हैं, जिससे उन्होंने हमारे उद्देश्य का प्रतिनिधित्व किया। लोगों के साथ उनका तादात्म्य और श्री मेहता का उन पर विश्वास इतना सम्पूर्ण था कि उनकी आकस्मिक मृत्यु एक बार को कुदरत का मज़ाक ही लगी।

उन्हें इस बात का पूरा श्रेय प्राप्त है कि वे हमारी कई समस्याओं से जूझे, उनमें से कुछ उन्होंने सुलझाई, कुछ हमारे लिये छोड़ दीं कि हम इनका सामना करें। परन्तु उनके द्वारा किये गये काम के प्रति हमारी भावनाओं ने, हमारे द्वारा किये जाने वाले

  1. लोकराजय : डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर, विशेष अंक 16 अप्रैल, 1981 पृष्ठ 33