212 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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“उस वक्तव्य का खंडन करते हैं, जो कथित रूप से आयोग के समक्ष दिया गया।
डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने हमें एक लम्बा वक्तव्य भेजा, जिसमें से हमने निम्न महत्त्वपर्ण सामग्री ली हैः-
इसी महीने की 6 तारीख के आपके अंक में छपे वक्तव्य पर मेरा ध्यान दिलाया गया है, जिसमें शोलापुर नगरपालिका के अध्यक्ष ने नगरपालिका के उस संकल्प का प्रचार किया है जिसमें उस वक्तव्य पर मेरे साक्ष्य में अंतर्निहित सुझाव का जोरदार
खंडन किया गया है कि शोलापुर स्थित दलित वर्ग छात्रावास को दिया जाने वाला अनुदान हिन्दू-मुस्लिम दंगों की प्रतिक्रिया स्वरूप रोका गया और जिन तथ्यों के चलते अनुदान रोका गया, उनका उल्लेख करते हुए.....
मेरे खिलाफ़ शिकायत इस अनुमान पर आधारित लगती है कि साइमन कमीशन के समक्ष मेरे साक्ष्य के दौरान मैंने कहा था कि शोलापुर स्थित दलित वर्गों के छात्रावास को दिया जाने वाला अनुदान नगर-पालिका द्वारा जान-बूझकर रोक दिया गया, क्योंकि शोलपुर के दलित वर्गों ने 1925 में हुए हिन्दू-मुस्लिम दंगों के दौरान सवर्ण हिन्दुओं की सहायता करने से इनकार कर दिया था, जो नगर-पालिका के अनुसार असत्य वक्तव्य है.....
नगर-पालिका के वक्तव्य पर मेरा जवाब यह है कि मेरे खिलाफ़ इसकी शिकायत बिल्कुल निराधार है और जान-बूझकर ग़लत पढ़े गये मेरे साक्ष्य पर आधारित है.....
मुझे पूरा विश्वास है कि हर न्यायप्रिय व्यक्ति इस बात से सहमत होगा कि अपने साक्ष्य में मैंने ऐसा कभी भी नहीं कहा कि अनुदान हिन्दू-मुस्लिम दंगों के दौरान दलित वर्गों द्वारा सवर्ण हिन्दुओं की सहायता न किये जाने की वजह से रोका गया। इसके विपरीत मैंने स्पष्ट रूप से कहा था कि मुझे नहीं मालूम कि कारण क्या था......
मैं चाहता हूॅं कि नगर-पालिका उस उलझन के लिये मेरी निंदा करना छोड़ दे, जो, यह समझती है कि, अपने साक्ष्य के दौरान मेरे द्वारा दिये गये वक्तव्य से पैदा हुई है। एक कदम और आगे बढ़कर वह यह कारण भी स्पष्ट करने की कोशिश