7. मन्दिर प्रवेश की बजाय आर्थिक, शैक्षणिक और सामाजिक सुधार पर अधिक ध्यान दें। - Page 233

216 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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मंदिर प्रवेश की बजाय आर्थिक, शैक्षिक व सामाजिक सुधार पर
अधिक ध्यान दें

“पूना, 18 अक्तूबर, 1932

डॉ. बी.आर. अम्बेडकर कल पूना आये और विधान परिषद् में कुछ समय बिताया, लेकिन उन्होंने यह किसी को नहीं बताया कि उन्हें यरवदा जेल में श्री गांधी से मिलने की अनुमति दी गई है। तथापि, शाम को उन्होंने इस अनुमति (परमिट) का प्रयोग किया और लगभग डेढ़ घंटा श्री गांधी के साथ बिताया। बाद में किसी व्यावसायिक काम से वे सावंतवाड़ी के लिये निकल गये। वे 26 अक्तूबर को बम्बई लौटेंगे और उम्मीद करते हैं कि 7 नवम्बर को इंग्लैण्ड के लिये रवाना हो जायेंगे।

डॉ. अम्बेडकर का मानना है कि गोलमेज़ सम्मेलन 22 नवम्बर से पहले शुरू नहीं हो पायेगा, क्योंकि शिष्टमंडल के कई सदस्यों के लिये 12 नवम्बर तक लंदन में उपस्थित हो पाना असंभव होगा। दलित वर्गों तथा सवर्ण हिन्दुओं के बीच वर्तमान स्थिति को देखते हुए, राजनीति और सामाजिक कल्याण को अलग-अलग कर पाना तो कठिन है, फिर भी समझा जाता है, कि परमिट की शर्तों के तहत विशिष्ट राजनीति पर रोक थी, इसलिये पूना संधि पर कोई बात नहीं हो पाई।

तथापि डॉ. अम्बेडकर ने श्री गांधी के सामने अस्पृश्यता-विरोधी लीग के भावी गठन, इसकी प्रांतीय तथा जिला समितियों और इसकी सामान्य प्रगति पर अपने विचार रखे। उन्होंने समितियों के गठन का मामला उठाया और बेहद गंभीरता से अपना दृष्टिकोण रखा कि इन समितियों में अधिकांश लोग दलित वर्गों से होने चाहियें। उनका मत था कि दलित वर्गों की आवाज़ प्रबल होनी चाहिये और ऐसा कुछ भी नहीं किया जाये जो उन्हें अरुचिकर लगे। यदि उनके उत्थान के कार्य को संतोषजनक तरीके से चलाना है, तो सवर्ण हिन्दुओं को चाहिये कि वे दलित वर्गों की सहायता करें, जिससे वे स्वयं अपना भला सोच सकें, न कि उन्हें हर तरीके से सवर्ण हिन्दुओं के आदर्शों का अनुसरण करने के लिए प्रेरित करके उनका उत्थान करने का प्रयास करें।

विशेष जनगणना

उन्होंने भारत में दलित वर्गों की एक विशेष जनगणना कराने के लीग के प्रस्ताव की ओर भी श्री गांधी का ध्यान आकर्षित किया और काँग्रेस नेता को बताया कि इस तरह का कोई क़दम उठाने की आवश्यकता नहीं है।