218 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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जाति प्रथा को समाप्त किये बिना बहिष्कृत जातियों का उत्थान नहीं
हो सकता ख्1,
’’अस्पृश्य वर्ग के हितों के लिये आवाज उठाते हुए’’ 11 फरवरी, 1933 को महात्मा गांधी ने ’’हरिजन’’ नाम से एक समाचार-पत्र शुरू किया। इस अवसर पर डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने कहा’’
’’मैं कोई संदेश नहीं दे सकता,’’ ख्2,
’’बहिष्कृत जातियाँ, जाति प्रथा का ही एक उत्पाद हैं। जब तक जातियाँ रहेंगी, बहिष्कृत जातियां भी रहेंगी। जाति प्रथा को समाप्त किये बिना बहिष्कृत जातियों का उत्थान नहीं हो सकता। इस निंदनीय एवं भ्रष्ट हठधार्मिता से हिन्दुत्व को मुक्त किये बिना आने वाले संघर्ष में हिन्दुओं का बने रह पाना कठिन होगा।’’
’’इसके जवाब में गांधी ने कहा कि कई शिक्षित हिन्दू भी यही मत रखते हैं, किन्तु वे इससे सहमत नहीं है।’’ ख्3, अस्पर्श्यता जाति प्रणाली से नहीं, बल्कि ऊँच-नीच के भेद से उत्पन्न हुई है, जो हिन्दुत्व में समा गया है और इसे खोखला करता जा रहा है। अस्पश्यता पर हमला ऊँच-नीच की इस भावना पर हमला है।’’ ख्4,
की, पृष्ठ 227।
कुबेर, बी.आर. अम्बेडकर, पृष्ठ 47।
कीर, पृष्ठ 227।
कुबेर, बी.आर. अम्बेडकर, पृष्ठ 47।