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संयुक्त संसदीय समिति की रिपोर्ट पर डॉ. अम्बेडकर
बेहतर प्रतिनिधित्व के लिए प्रावधान की माँग
संयुक्त प्रवर समिति की रिपोर्ट पर, जहां तक उसका संबंध दलित वर्गों के साथ है, डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने अपने विचारों के एक वकत्व्य में ऐसे लिखा है।
डॉ. अम्बेडकर ने आगे कहा है :
’’यद्यपि मेरे और दलित वर्गों के लिये यह बहुत संतोष की बात है, कि संयुक्त संसदीय समिति द्वारा ’पूना संधि’ को नहीं छेड़ा गया है। फिर भी यह जरूर स्पष्ट करना चाहूंगा कि फेडरल असेंबली (प्रोविंशियल) सैकेण्ड चैम्बर में प्रतिनिधित्व के मामले, संयुक्त संसदीय समिति द्वारा पेश किये गये बदलाव दलित वर्गों के प्रति अन्यायपूर्ण हैं। इस प्रकार, जहां तक इसका संबंध दलित वर्गों से है, संयुक्त संसदीय समिति की रिपोर्ट पर अपने विचार रखते हुए लिखे गये एक वक्तव्य में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने कहा :-
दलित वर्गों ने प्रांतों में सैकेण्ड चैम्बर की स्थापना का विरोध किया। मॉन्टेगा- चैम्स्फोर्ड सुधारों के अंतर्गत इन्हें अनावश्यक ठहराया गया था, साइमन कमीशन द्वारा भी इनकी सिफारिश नहीं की गई थी। भारत के सभी राजनैतिक संगठन इनकी निन्दा करते हैं। दलित वर्गों की नज़र में यह अवनति की ओर बढ़ाया गया एक कदम है, जो देश की प्रगति में रुकावट साबित होगा।
गठन
दलित वर्गों द्वारा सैकेण्ड चैम्बर्स के विरोध का दूसरा आधार इनके गठन से संबंधित है। यह ज़ाहिर है, कि सैकेण्ड चैम्बर की स्थापना की गई है, क्या उनमें दलित वर्गों के लिये कोई स्थान आरक्षित है? मुसलमानों, यूरोपियों तथा भारतीय ईसाइयों के प्रतिनिधियों के लिये इन प्रांतीय सैकेण्ड चैम्बर्स में विशेष प्रावधान रखा गया है। परंतु, किसी भी प्रांत में दलित वर्गों के लिये इस तरह का कोई भी प्रावधान नहीं रखा गया है। बम्बई, मद्रास और संयुक्त प्रांत के दलित वर्गों, सवर्ण हिन्दू उम्मीदवारों के साथ अनारक्षित (आम) सीटों पर सीधे चुनाव लड़कर अपना प्रतिनिधित्व प्राप्त करने के लिये छोड़ दिया है।