खण्ड - I महाड सत्याग्रह पानी के लिए नहीं, बलिकु मानवाधिकारों की स्थापना के लिए - Page 25

8 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

संख्या आसानी से गुंंडों की संख्या से अधिक थी और वे गुंडों की खोपडि़यां फोड़ देते। अछूतों में सैकड़ों ऐसे आदमी थे जो प्रथम विश्वयुद्ध के युद्ध क्षेत्र और लड़ाइयां को देख चुके थे, उनमें लड़ चुके थे और उनमें सक्रिय रूप से भाग ले चुके थे।

परंतु उनके नेता के आदेश से आश्चर्यजनक अनुशासन बनाए रखा गया। उनके चेहरे हमलावरों के विरुद्ध कड़े हो गए। संघर्ष अहिंसक और संवैधानिक था। उन्होंने कानून तोड़ने की कल्पना नहीं की। इस प्रकार एक बहुत गंभीर दंगे को रोक दिया गया। शाम होने पर सभी प्रतिनिधि अपने-अपने गांवों को चले गए। डॉ. अम्बेडकर ने अपने समर्थक अनन्तराव चित्रे सहित बंगला छोड़ दिया, क्योंकि वह उस शाम से एक सरकारी अधिकारी द्वारा बुक करवाया हुआ था और वे पुलिस स्टेशन के कमरों में रहे। उन्होंने दंगे की जांच पूरी की और 23 मार्च को बंबई वापस चले गए।

पुलिस दंगा समाप्त होने के पश्चात घटनास्थल पर पहुंची। उन्होंने कुछ रूढि़वादी दंगाइयों को अतिक्रमणकारियों के रूप में गिरफ्तार किया। नौ रूढि़वादी हिन्दू नायकों में से पांच को जिन्हें अत्यधिक साहसिक समझा गया था, बाद में 6 जून, 1927 को जिलाधीश द्वारा चार माह के कठोर कारावास की सजा दी गई। डॉ. अम्बेडकर ने सच ही यह टिप्पणी की थी कि यदि जिले में मुख्य अधिकारी गैर-हिन्दू न होते, तो अछूतों के साथ निष्पक्ष रूप से न्याय नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि पेशवा-शासन के अधीन उन्हें हाथी द्वारा कुचल कर मार दिया जाता। पेशवा-शासन के अधीन अछूतों को दिन के कुछ घंटों के दौरान पूना शहर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाती थी और जब उनको दूसरे मौकों पर आने की अनुमति दी जाती थी तो उन्हें थूकने के लिए अपने गर्दनों में मिट्टी के बर्तन लटकाए शहर में जाना पड़ता था।” ख्1,

”द बंबई क्रॉनिकल” द्वारा महाद सम्मेलन की रिपोर्ट

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कोलाबा जिले के दलित वर्गों का एक सम्मेलन डॉ. बी.आर. अम्बेडकर, बार-ऐट-लॉ की अध्यक्षता में वर्तमान माह (अर्थात् मार्च, 1927) की 19 और 20 तारीख को महाद में हुआ। दलित वर्गों की उपस्थिति 2,500 से अधिक थी और उनमें बड़ा उत्साह था। परंतु सम्मेलन की कार्रवाई में एक दंगे द्वारा गंभीर बाधा डाली गई, जिसकी जिम्मेदारी पूर्णतया महाद कस्बे के उच्च वर्ग के हिन्दू निवासियों की है। सम्मेलन के पहले दिन, अध्यक्ष द्वारा अपना भाषण दिए जाने के पश्चात अनेक उच्च वर्ग हिन्दुओं ने सम्मेलन को संबोधित किया और दलित वर्गों को यह आश्वासन दिया कि वे हर प्रकार से उनकी सहायता करने को तैयार हैं और उनसे आग्रह किया

  1. कीर, पृष्ठ 69-71, 73-77 ।