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डॉ. अम्बेडकर के अनुसार, आद-धर्मी आंदोलन पर विवाद इतना गंभीर हो गया कि कई हत्यायें हो गईं। चाहे जो भी हो, आद-धर्मियों को अनारक्षित निर्वाचन-क्षेत्रों में ’’अनुसूचित जाति’’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है, उनकी इस स्पष्ट घोषणा के बावजूद भी कि वे हिन्दू नहीं हैं।
अपने स्वयं के तथा अपने अनुयायियों के विषय में डॉ. अम्बेडकर ने स्पष्ट किया कि हिन्दुत्व के बारे में दृष्टिकोण नकारात्मक है और अब तक किसी अन्य धर्म के प्रति सकारात्मक जुड़ाव नहीं है।
इसी प्रकार ’रामदासी’ धर्म से सिक्ख हैं, किंतु अनारक्षित निर्वाचन-क्षेत्रों में ’’अनुसूचित जातियों’’ के अंतर्गत वर्गीकृत हैं। डॉ. अम्बेडकर के अनुसार इन सब बातों से यही ज़ाहिर होता है कि निर्वाचक वर्गीकरण का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है जो धार्मिक समूहों के ठीक विपरीत गया है।
इस प्रकार, यद्यपि डॉ. अम्बेडकर पूना संधि के अंतर्गत दलित वर्गांं को दिए गये विशेषाधिकार शिकायत करने या उन्हें चुनौती देने के हिन्दुओं के अधिकार को मान्यता नहीं देते, तथापि उन्होंने दृढ़ता से कहा कि उनके समुदाय के राजनीतिक अधिकार हिन्दुत्व छोड़ने का इरादा करने या छोड़ देने पर भी प्रभावित नहीं होंगे।’’ ख्1,
- द टाइम्स ऑफ इंडिया, 24 जुलाई, 1936।