241
वास्वत में, यदि ‘शैतानी’ होने का दोष किसी व्यक्ति पर लगाया जाना चाहिये, तो वे डॉ. मूँजे हैं, जिन्होंने शिष्टाचार के लिये किसी सम्मान के बिना व्यक्तिगत एवं गोपनीय पत्र-व्यवहार को प्रकाशित करवा दिया। लेकिन मैं इस मामले में कुछ और नहीं कहना चाहता।
शंकराचार्य डॉ. कुर्ताकोटि और अन्य प्रमुख हिन्दू नेता अस्पृश्यों के सिक्ख धर्म अपनाने के पक्ष में हैं। वास्तव में इन्हीं नेताओं ने अस्पृश्यों द्वारा सिक्ख धर्म अपनाये जाने के विचार का प्रचार किया है.... और मुझे भी ऐसा करने के लिये राजी किया है। मुझे इनका मत मुख्यतः इसलिये पसंद आया, क्योंकि मैं भी मानता हूँ कि हिन्दू संस्कृति तथा सभ्यता के भविष्य के प्रति मेरी कुछ जिम्मेदारी है। समाचार पत्रों में प्रकाशित पत्र-व्यवहार पर मेरे विचार पढ़ने के बाद हिन्दू स्वयं इस बात का निर्णय ले सकते हैं, कि अस्पृश्यों के सिक्ख धर्म अपनाने के विषय में श्री गांधी, श्री राजा तथा श्री राजगोपालाचारी द्वारा तय की गई नीति हिन्दू समाज के लिये फ़ायदेमंद है या नहीं। ख्1,
- डॉ. अम्बेडकर का बयान, जनता (मराठी) में दिनांक 15 अगस्त, 1936 को प्रकाशित।