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अन्य देश में ऐसे मंत्री को बर्ख्वास्त कर दिया जाता। लेकिन क्या भारत में ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती है? महात्मा को दलित वर्ग को जवाब देना होगा कि वे और उनका प्रधान मंत्री अपने एक मंत्री के ऐसे निंदनीय कृत्य को कैसे न्यायोचित ठहरा सकते हैं।
बंबई बी.आर. अम्बेडकर‘‘ ख्1,
- द टाइम्स ऑफ इंडिया, 19 मर्च, 1938 ।