17. समाजवादी अब निष्क्रिय हैं। - Page 263

246 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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समाजवादी अब निष्क्रिय हैं

‘‘21 मई, 1938 को बम्बई पहुँचने पर एक साक्षात्कार के दौरान डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने अपनी पार्टी के प्रति लोगों के बढ़ते समर्थन पर और दासता मिटाने की दिशा में किये गये प्रयासों के प्रति उनकी कृतज्ञ सराहनाओं पर गहरा संतोष व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि उनकी इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी अपने तरीके से अपने चुनावी वायदे पूरे करने का भरसक प्रयास कर रही है, किंतु यदि काँग्रेस मंत्रालय संवैधानिक तरीकां से राहत देने से इंकार करता है और इस तरह लोगों का विश्वास यदि उस पर से उठ जाता है, तो विकल्प स्पष्ट है। परन्तु उन्होंने समाजवादियों के रवैये पर आश्चर्य प्रकट किया, जो हमेशा से ज़मीदारों की ज़मीन जब्त करने और पूँजीवाद खत्म करने के लिये नारे लगाते रहे हैं, लेकिन अब जबकि “खोटी” प्रणाली को समाप्त करने के लिये एक ठोस प्रस्ताव सामने लाया गया है, वे बिल्कुल निष्क्रिय हो गये हैं। ख्1,

  1. कीर, पृष्ठ 310।