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1938 का विधेयक न. ......
साहूकारी को नियंत्रित तथा विनियिमित करने के लिये विधेयक
क्योंकि कानून द्वारा साहूकार के रूप में कारोबार कर रहे व्यक्तियों के कर्त्तव्यों तथा दायित्वों को निर्धारित करना और इस कारोबार को नियंत्रित व विनियमित करना युक्तिसंगत है। एतत् द्वारा निम्न अधिनियम बनाया जाता हैः-
| v | è; | k; |
|---|
लघु
शीर्षक, विस्तार तथा प्रास्ताविक प्रारंभ
1 (1) इस अधिनियम को बम्बई साहूकार अधिनियम, 1938 कहा जाये।
(2) यह पूरे बम्बई प्रांत पर लागू होगा और इस अधिनियम के पारित होने के बाद एक वर्ष के भीतर उस तिथि से प्रभावी होगा जो सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत की जाए।
परिभाषायें
- इस अनिधिनम में, जब तक कि कुछ विषय या संदर्भ से असंगत न हो-
( i ) “अधिकृत नाम” और “अधिकृत पता” का अर्थ क्रमशः वह नाम और पता होगा, जिस पर इस अधिनियम के तहत किसी साहूकार को साहूकारी का कारोबार चलाने के लिये लाइसेंस प्रदान करके अधिकृत किया गया है।
( ii ) “कारोबार का नाम” का तात्पर्य उस नाम पर शैली से है, जिसके अंतर्गत साहूकारी का कोई कारोबार चलाया जा रहा है, चाहे सहभागिता में या अन्यथा।
( iii ) “ऋणी” अथवा “देनदार” का तात्पर्य उस व्यक्ति से है, जिस पर साहूकार का ऋण के रूप में कोई दावा है।
(iv) ‘‘ब्याज अर्थपूर्ण है और इसमें शामिल है जिंस, नकदी, सेवा या किसी अन्य रूप में और किसी भी नाम से बुलाई जाने वाली वह राशि जो साहूकार को ऋण के प्रतिफल के रूप में या अन्यथा मूलधन से अधिक दी गई अथवा लौटाई गई दी जाने वाली अथवा लौटाई जाने वाली हो।