19. धन-ऋणदाय के नियंत्रण और विनियमन के लिए विधेयक। - Page 271

254 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

‘‘ब्याज’’ के तात्पर्य में राशि, नकदी सेवा या किसी अन्य रूप में और किसी भी नाम से मूलधन के अतिरिक्त कोई भी राशि शामिल है, जो साहूकार को ऋण के संबंध में दी गई है या दी जानी है।

( v ) “ऋण” का अर्थ है ब्याज पर दिया गया उधार, चाहे नकदी के रूप में या जिंस के रूप में और इसमें पिछले दायित्वों तथा वास्तविक अर्थ में ऋण कहलाने वाले किसी अन्य लेन-देन के संबंध में दिया गया वचन भी शामिल है।

( vi ) “साहूकार” का तात्पर्य हर उस व्यक्ति से है, जो पैसे उधार देने का कारोबार करता है या जो अपना प्रचार या घोषणा पैसा उधार देने वाले के रूप में करता है या किसी भी रूप में स्वयं को यह कारोबार करने वाला मानता है और इसमें आधि-व्यवसायी भी शामिल हैं, लेकिन निम्न इसमें शामिल नहीं हैंः-

(क) को-ऑपरेटिव सोसायटी अधिनियम, 1912 और प्रोविडेंट इंश्योरेंस

सोसायटीज़ अधिनियम, 1912 के अंतर्गत पंजीकृत कोई भी सोसायटी,

(ख) किसी विशेष अधिनियमन द्वारा उस अधिनियम के अनुसार ऋण देने हेतु

निगमित कोई कॉर्पोरेट निकाय,

(ग) सरकार या उसके द्वारा अपनी ओर से ऋण देने के लिये प्राधिकृत कोई

व्यक्ति, और

(घ) कोई भी व्यक्ति जो मात्र अपने कारोबार के उद्देश्य से और कारोबार के

दौरान ऋण देता हो, यदि वह और

( i ) बैंकिंग या बीमा का कारोबार, या

( ii ) कोई अन्य कारोबार, जिसका प्रमुख उद्देश्य ऋण देना नहीं

है।

( vii ) “भुगतान” या ‘‘वापसी’’ के तात्पर्य में जिन्स, नकदी या सेवा

के रूप में दी गई या लौटाई गई कोई भी राशि शामिल

है।

( viii ) “व्यक्ति” में कम्पनी और फर्म शामिल हैं।

स्पष्टीकरण I. साहूकार के कर्त्तव्यों तथा दायित्वों के उद्देश्य के लिये “कम्पनी” में प्रबंध एजेंट तथा प्रबंध निदेशक और “फर्म” के मामले में सभी भागीदार शामिल होंगे।