264 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अध्याय
साहूकार के कर्त्तव्य
सभी लेन-देन लिखित में हों
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24 (1) इस अधिनियम की शुरूआत के बाद से ऋण के पुनर्भुगतान या ऋण पर ब्याज के भुगतान और ऋण की प्रतिभूति के लिये किये गये हर अनुबंध को लेनदार द्वारा व्यक्तिगत रूप से हस्ताक्षर किये गए एक लिखित ज्ञापन द्वारा प्रमाणित करना होगा।
(2) ज्ञापन एक निर्धारित फार्म पर होना चाहिए और इस पर अनुबंध की सभी शर्तें लिखी होंगी और इसमें विशेष रूप से निम्न बातें संविदा होंगीः
(क) वह तिथि जिस पर ऋण लिया गया,
(ख) ऋण की राशि,
(ग) प्रतिफल का स्वरूप,
(घ) ब्याज,
(ड.) किस तरह की प्रतिभूति ली गई है, और
(च) यदि ऋण आंशिक या पूर्ण रूप से पहले लिये गये किसी ऋण को सुपरसीड
करता है, तो वह ऋण और उसकी प्रतिभूति, यदि कोई है।
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ज्ञापन की प्रति देनदार को दी जाये
इस तरह के हर ज्ञापन की प्रति संविधा की तारीख के सात दिनों के भीतर साहूकार द्वारा देनदार को दी जाएगी। धारा 23 या 24 के उल्लंघन में हुआ लेन-देन अमान्य
किसी संविदा या प्रतिभूति में यह साबित हो जाता है कि ऋण दिये जाने से पहले या यथास्थिति प्रतिभूति लेने से पहले देनदार द्वारा ज्ञापन पर हस्ताक्षर नहीं किये गये या इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट धरा 24 के प्रावधान के तहत इस ज्ञापन की एक प्रति संविदा किये जाने के सात दिनों के भीतर देनदार को नहीं भेजी गई, तो वह अमान्य समझा जायेगा।