19. धन-ऋणदाय के नियंत्रण और विनियमन के लिए विधेयक। - Page 282

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’धारा 23 या’ जोड़ा जाये-संपादक

  1. इस अधिनियम के आरंभ होने के बाद की गई कोई भी संविदा अमान्य होगी, जिसमें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में, देनदार से चक्रवृद्धि ब्याज लेने की बात कही गई हो या भुगतान में चूक हो जाने पर ब्याज की दर बढ़ा दिये जाने का जि़क्र हो, और वह किसी भी ब्याज का हकदार नहीं होगाः

बशर्ते कि किसी संविदा द्वारा यह प्रावधान रखा गया हो कि यदि निर्धारित तिथि पर साहूकार को संविदा के अंतर्गत निहित किसी देय राशि का भुगतान नहीं किया जाता, चाहे यह मूलधन के रूप में हो या ब्याज के रूप में, तो साहूकार को चूक की तिथि से इस राशि का भुगतान किये जाने तक साधारण ब्याज लेने का हक होगा, इस ब्याज की दर किसी चूक के अलावा मूलधन पर देय दर से अधिक नहीं होनी चाहिये और इस तरह लिये गये ब्याज को इस अधिनियम के तहत, ऋण पर लिया गया ब्याज नहीं माना जायेगा।

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