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बही खातों में वह ऋण और ऋणों की प्रतिभूतियों यदि कोई हों, से संबंधित सभी
लेन-देनों का विवरण दर्ज करेगा। यह विवरण सरकार द्वारा समय-समय पर निध
ार्रित की जाने वाली लिपि तथा अंकों में और स्याही से लिखा जाएगा।
- (1) हर वर्ष 31 जनवरी को या इससे पहले साहूकार को अपने द्वारा पिछले
वर्ष के दौरान प्रयोग किये गये बहीखातों को लाइसेंसिंग अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत
करना होगा।
(2) इसके बाद लाइसेंस अधिकारी चालू खाते के मामले में हर बहीखाते के दोनों
तरफ पहली और आखिरी प्रविष्टि पर और बही (लैजर) के मामले में बही के हर
खाते की पहली और आखिरी प्रविष्टि पर हस्ताक्षर करके तारीख डालेगा।
(3) लाइसेंसिंग अधिकारी चालू खाते की आखिरी प्रविष्टि के बाद उन बहियों
का विवरण भी देगा, जो साहूकार को गत वर्ष में जारी की गई थीं, किंतु उस वर्ष
के दौरान उसके द्वारा प्रयोग में नहीं लाई गइंर्ं।
बहियों की वे प्रविष्टियाँ, जो धारा 31 और 32 * के अनुरूप न हों वे साक्ष्य के
रूप में मान्य नहीं होंगी।
* यह धारा 32 और 33 हो सकता है- संपादक
- भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 में चाहे जो भी कहा गया हो, किसी भी
बही खाते, रजिस्टर या रिकॉर्ड में दर्ज ऋण या प्रतिभूति से संबंधित कोई भी प्रविष्टि
साहूकार के लिये किसी मुकदमे या कार्रवाई में साक्ष्य के रूप में मान्य नहीं होगी,
जब तक कि वह इस अधिनियम की धारा 32 के तहत, सरकार द्वारा उपलब्ध कराये
गये बहीखातों में, इसी धारा द्वारा निर्धारित ढंग से दर्ज न की गई हो और यदि यह
प्रविष्टि गत वर्ष की हो तो धारा 33 के अनुरूप प्रमाणित की हुई होनी चाहिए।