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(ख) उसने या किसी और ने कब या कितनी बार उसके अपने नाम के अलावा
किसी और नाम से ऋण या धन उधार दिया है, और
(ग) क्या वह अपने या किसी और के नाम से यदि किसी और के नाम से तो
किस नाम से और कब साहूकार के रूप में पंजीकृत रहा है।
(2) इस तरह की पूछताछ पर नागरिक प्रक्रिया संहिता (कोड ऑफ़ सिविल प्रोसीजर), के आदेश 11 के प्रावधान लागू होंगे।
कुछ लेन-देन पुनः खोलने की अदालत की शक्ति
- यदि कोई मुकदमा या कार्रवाई इस अधिनियम के प्रभावी होने के बाद शुरू हुई हो या उस प्रयोग में आने के समय विचाराधीन हो और लेन-देन से पता चलता हो कि
(क) ब्याज की दर अत्यधिक है
(ख) उसमें पक्षों के बीच व्यवहार नितांत अनुचित है,
तो अदालत निम्न में से एक या एक से अधिक शक्तियाँ प्रयोग में ला सकती है-
( i ) लेन-देन को पुनः खोलकर, दोनों पक्षों के बीच हुए व्यवहार का विवरण लेकर, अत्यधिक ब्याज के संदर्भ में ऋणी को सभी दायित्वों से मुक्त करना।
( ii ) पिछले व्यवहार बंद करके एक नया अनुबंध पत्र बनाने के लिये हुए करार के बावजूद, उन। के बीच पहले हो चुके किसी भी व्यवहार को पुनः खोलना और अत्यधिक ब्याज के संदर्भ में ऋणी को सभी दायित्वों से मुक्त करना और यदि इस तरह के दायित्व के रूप में पहले कोई भुगतान किया जा चुका हो, तो साहूकार को उतनी धन राशि लौटाने का आदेश देना, जितना कि अदालत उचित समझती हो।
( iii ) किसी ऋण के संदर्भ में दी गई प्रतिभूति या किये गये क़रारनामे को आंशिक या पूर्ण रूप से रद्द करना, इसे संशोधित या परिवर्तित करना और यदि साहूकार ने प्रतिभूति इस्तेमाल कर ली हो, तो उसे उस ढंग से तथा उस सीमा तक, देनदार की क्षतिपूर्ति करने का आदेश देना, जो कि अदालत उचित समझती हो।
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- धारा 38 द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करते हुएः
( i ) व्यवहार की तिथि से 20 वर्ष से अधिक बीत चुके किसी लेन-देन पर पक्षों