19. धन-ऋणदाय के नियंत्रण और विनियमन के लिए विधेयक। - Page 287

270 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

द्वारा या किसी व्यक्ति द्वारा यदि पुराने लेन-देन बंद करके नया अनुबंध

पत्र तैयार करने का क़रारनामा हो चुका है तो अदालत उसे पुनः नहीं

खोलेगी, या

( ii ) अदालत ऐसा कुछ नहीं करेगी जिससे न्यायालय की डिक्री प्रभावित

होती हो।

स्पष्टीकरण : यदि किसी मुकद्दमे में धारा 38 के खंड (1) के तहत लेन-देनां

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की एक शृंखला सामने आती है, तो “लेन-देन” शब्द का तात्पर्य पहले लेन-देन से होगा।

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  1. धारा 37 के उद्देश्य से ब्याज अधिक समझा जायेगा यदि इसकी दर ऋण या व्यवहार की तिथि पर रिज़र्व बैंक या इम्पीरियल बैंक या बैंक ऑफ बॉम्बे, जो भी लागू हो, की ब्याज दर से :

(1) तीन गुना से अधिक हो, असुरक्षित ऋण के मामले में,

(2) ढाई गुना से अधिक हो, दूसरे या अनुवर्ती बंधक से सुरक्षित ऋण के मामले

में,

(3) डेढ़ गुना से अधिक हो, पहले बंधक या गिरवी से सुरक्षित ऋण के मामले में।

खाते लिखने की विधि
  1. धारा 37 के तहत खाते निम्न नियमों के अनुसार रखे जाएंगे-

( i ) मूलधन तथा ब्याज का खाता अलग-अलग हो,

( ii ) मूलधन के खाते में वह पैसा, जो ऋणी द्वारा साहूकार से समय-समय

पर प्राप्त किया गया हो और उन वस्तुओं का मूल्य जो साहूकार के

द्वारा लेन-देन के तहत बेची गई हों, जोड़ा जायेगा।

( iii ) मूलधन के खाते में वह संचित ब्याज देनदार को डेबिट नहीं किया

जाएगा जो लेन-देन के दौरान किये गये किसी अनुबंध या खातों के

निबटारे द्वारा मूलधन में बदल दिया गया हो।

( iv ) ब्याज के खाते में उस समय बकाया मूलधन पर, दोनों पक्षों के बीच तय