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की गई दर से साधारण ब्याज जोड़ा जायेगा, लेकिन किसी भी मामले
में बयाज की दर धारा 38 में बताई गई दर से अधिक नहीं होगी।
( v ) ऋणी द्वारा या उसकी ओर से साहूकार को या उसके खाते में अदा की
गई सभी धन राशियाँ, ओर जिंस में सभी भुगतान, सभी लाभ, सेवा या
किसी भी अन्य तरह के फायदे, जो साहूकार को लेन-देन के दौरान
प्राप्त हों, पहले ब्याज के खाते में जमा किए जाएँगे और जब कोई
भुगतान उस समय तक देय ब्याज के शेष को चुकाने के लिए पर्याप्त
से अधिक हो तो उस भुगतान था शेष देनदार के मूलधन के खाते में
क्रेडिट कर दिया जाएगा।
( vi ) मूलधन तथा ब्याज के खाते मुकदमा शुरू होने के दिन तक पूरे बनाये
जायेंगे और दोनों खातों में देय बकाया राशि का कुल जोड़ उस तिथि
तक की कुल देय राशि समझी जायेगी, यदि ब्याज के खाते की देय राशि,
मूलधन खाते की देय राशि से अधिक हो, तो मूलधन की बकाया राशि
का दोगुना उस समय देय राशि मानी जायेगी।
| fM | Ø |
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| Col1 | jus |
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| fu | nsZ' |
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बंधक डिक्री पर देय राशि का भुगतान किस्तों में करने का निर्देश
देने की शक्ति
- अदालत निर्णीत- ऋणी की किसी भी अजऱ्ी पर, डिक्री धारक को सूचित करने के बाद यह निर्देश दे सकती है कि इस अधिनियम के शुरू होने से पहले या बाद में ऋण के संबंध में पास की गई किसी भी डिक्री, जिसमें उस बंधक से संबंधित मुकदमे में पास की गई डिक्री भी शामिल है, जिससे ऋण को सुरक्षित किया गया हो, की राशि का भुगतान, डिक्री की राशि और निर्णीत ऋणी की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, अदालत द्वारा तय की गई तिथियों पर, उतनी किस्तों में किया जाये, जितनी अदालत उचित समझती हो।
| fM | Ø |
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| aèk | d |
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| d | j |
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| d | k |
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| fu | n | sZ'k |
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डिक्री में बंधक पर देय राशि का भुगतान किस्तों में करने का निर्देश
दिया जा सकता है
- बंधक, जिससे ऋण सुरक्षित किया गया हो, से संबंधित किसी मुकद्दमे में डिक्री पास करते हुए अदालत मुकदमे में निर्धारित राशि को किस्तों में अदा करने के