272 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
निर्देश दे सकती है, चाहे साहूकार तथा ऋणी के बीच हुई संविदा में इसके विपरीत कोई शर्त तय की गई हो।
निर्णीत-ऋणी की सम्पत्ति का आकलन अदालत करेगी
- जब निर्णीत-ऋणी की सम्पत्ति की बिक्री द्वारा किसी डिक्री के निष्पादन के लिये अर्जी दी गई हो तो, चाहे कोड ऑफ सिविल प्रोसीजर, 1908 में कुछ भी कहा गया हो, अदालत दोनों पक्षों को सुनेगी और उस सम्पत्ति या सम्पत्ति के उस हिस्से, जिसकी बिक्री से प्राप्त धन राशि अदालत समझती हो कि डिक्री के निष्पादन के लिये पर्याप्त है, के मूल्य का आकलन करेगी।
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निर्णीत-ऋणी की सम्पत्ति का केवल यथोचित हिस्सा ही बेचा जायेगा
- कोड ऑफ सिविल प्रोसीजर, 1908 में चाहे कुछ भी कहा गया हो, सम्पत्ति के केवल उतने ही हिस्से की बिक्री की घोषणा की जायेगी, जिससे प्राप्त होने वाला मूल्य अदालत की राय में डिक्री के पूरे भुगतान के लिये पर्याप्त हो और यह उक्त घोषणा में विनिर्दिष्ट मूल्य से कम मूल्य पर नहीं बेची जायेगी।
अतिब्याज उधार अधिनियम के तहत अदालत की शक्ति की रक्षा
- यहाँ लिखा गया कुछ भी अति ब्याज और अधिनियम, 1918 के तहत अदालत को प्रदान की गई शक्तियों को प्रभावित नहीं करेगा, बशर्ते कि इस अधिनियम में कुछ अन्यथा प्रावधान न हो।
प्रांत से बाहर की संविदा अमान्य
- इस अधिनियम के प्रभावी होने के बाद दिये गये किसी ऋण के संबंध में, यदि साहूकार तथा ऋणी के बीच हुई किसी संविदा में देय राशि का भुगतान बम्बई प्रांत से बाहर करने की बात कही गई हो, तो यह संविदा अमान्य होगी।
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ब्याज की बकाया राशि का भुगतान करने का करार अमान्य
- ऋणी द्वारा ऋण पर देय ब्याज की बकाया राशि का भुगतान करने हेतु किया गया कोई भी करार मान्य नहीं होगा।