12 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अम्बेडकर ने सकारण रोश की मनःस्थिति में उत्तर दिया कि शिक्षा का प्रसार और धर्मग्रंथों की व्याख्या मात्र से यह पुरानी बीमारी ठीक नहीं हो पाएगी। उन्होंने कहा कि बीमारी गहरी जड़ जमा चुकी है और उसे केवल ज्ञान की मरहम पट्टी करके अथवा निष्कपट योजनाओं द्वारा ठीक नहीं किया जा सकता। घातक बीमारियों को अचूक आमूल उपचार की आवश्यकता पड़ती है। [1]
तद्नुसार, 26 जून, 1927 को बहिष्कृत भारत यह घोषणा की गई कि दलित वर्गों के वे सदस्य, जो महाद हिन्दुओं द्वारा टैंक के शुद्धिकरण के अपने कार्य द्वारा दलितों के सारे वर्ग पर लगे अपवित्रता के कलंक को धोना चाहते हैं, और जो चौदार टैंक से पानी लेने के लिए अपने प्रतिनिधियों पर किए गए हमले की निंदा करना चाहते हैं, अपने नाम बंबई में बहिष्कृत हितकारिणी सभा के कार्यालय में लिखवा दें। घोषणा की गई कि सत्याग्रह उक्त संस्था के तत्वावधान में आरंभ किया जाएगा।” ख्1,
1.1. परिषिष्ट कीर पृष्ठ 77, 79, 89-90 I, II और III देखिए।