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डॉ. अम्बेडकर के आंदोलन संबंधी कार्यक्रम की पुलिस रिपोर्ट
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महाद के दलित वर्गों पर किए गए अत्याचार :
बंबई के अछूतों द्वारा विरोध
बंबई शहर एस. बी., 4 जुलाई, 1927 - बहिष्कृत हितकारिणी सभा के तत्वावधान में कोलाबा जिले में महाद के अछूतों के साथ किए गए दुर्व्यवहार का विरोध करने के लिए 3 जुलाई की शाम को दलित वर्गों की एक सार्वजनिक सभा कावासजी जहांगीर हॉल में हुई। डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर, बार-ऐट-लॉ ने लगभग 1,000 लोगों से भी अधिक की सभा की अध्यक्षता की।
अध्यक्ष, रगोबा नारायण वनमाली, महादेव अबाजी कामली, सीताराम नामदेव शिवतारकर, निर्मल लिम्बाजी गंगवाने, गीतानंद ब्रह्मचारी और सामंत नानजी मारवाड़ी ने भाषण दिए जिनमें उन्होंने अपने भाइयों के साथ महाद में उच्च वर्गों द्वारा किए गए व्यवहार की निंदा की। उन्होंने इस व्यवहार के विरुद्ध शांतिपूर्ण आंदोलन करने के लिए स्वयंसेवकों की सूची तैयार करने और धन एकत्र करने का निर्णय लिया। वे दिवाली की छुट्टियों के पश्चात् महाद में एक सम्मेलन करेंगे और तत्पश्चात् नागरिकों के रूप में अपने अधिकारों के प्रवर्तन हेतु सत्याग्रह आरंभ करने का निर्णय लिया जाएगा। इस संबंध में एक संकल्प पारित किया गया।
एक अन्य संकल्प पारित किया गया जिसमें सरकार से अनुरोध किया गया कि दलित वर्गों की शिकायतों से निपटने के लिए एक अलग विभाग स्थापित किया जाए जैसा कि मद्रास में किया गया था।
वक्ताओं द्वारा धन देने की अपील की गई और लगभग 350 रुपए इक्ट्ठा किए गए। एक दर्जन लोगों ने सत्याग्रह आंदोलन आरंभ किए जाने पर उसके लिए स्वयंसेवक बनने की स्वीकृति दी। ख्1,
- बंबई सीक्रेट एब्स्ट्रैक्ट, दिनांक 16 जुलाई, 1927।