19. धन-ऋणदाय के नियंत्रण और विनियमन के लिए विधेयक। - Page 292

275

पहले- ( i ) कोई साहूकार बिना लाइसेंस प्राप्त किये साहूकारी का कारोबार नहीं चला सकता और लाइसेंस ऐसे किसी व्यक्ति को प्रदान नहीं किया जा सकता जिसके पास चरित्र प्रमाण-पत्र न हो।

( ii ) इस विधेयक के तहत निर्धारित किये गये किसी भी कर्त्तव्य का अतिक्रमण किये जाने की स्थिति में साहूकार का लाइसेंस निलंबित किया जा सकता है या वापस लिया जा सकता है।

दूसरे- ( i ) इस विधेयक के अनुसार साहूकार द्वारा दिये गये सभी सुरक्षित तथा असुरक्षित ऋणों को लिखित में हस्ताक्षर कराकर ऋणी द्वारा प्रमाणित करवाना होगा;

( ii ) साहूकार द्वारा ऋणी को एक पास-बुक दी जाएगी, जिसमें साहूकार द्वारा उनके बीच हुए सभी व्यवहारों का विवरण दिया जाएगा;

( iii ) साहूकार द्वारा हर वर्ष ऋणी को उसके खाते का विवरण भेजा जाएगा;

( iv ) चक्रवृद्धि ब्याज या अन्य लागतें वसूल करना अवैध होगा।

तीसरे- विधेयक में साहूकार द्वारा खाते रखे जाने की विधि बताई गई है। इसके तहत :

( i ) साहूकार अपने खाते सरकार द्वारा उपलब्ध कराये गये बही-खातों में ही रखेगा;

( ii ) हर वर्ष के अंत में वह अपने बही-खाते सरकारी अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करेगा जो उनकी पहली तथा आखिरी प्रविष्टि पर हस्ताक्षर करेगा;

( iii ) जो बही-खाते इन नियमों के अनुरूप नहीं होंगे, वे किसी भी मुकदमे या कार्रवाई में साक्ष्य के रूप में मान्य नहीं होंगे।

चौथे- इस विधेयक में साहूकार तथा ऋणी के बीच मुकददमों के संबंध में प्रावधान दिये गये हैं। इनमें कहा गया है कि :

( i ) इस तरह के मुकदमे स्मॉल कॉज़ कोर्ट में नहीं सुने जायेंगे, जब तक कि वे किसी इकहरी प्रविष्टि के विषय में न हों;

( ii ) अदालत किसी भी व्यवहार को पुनः खोल सकती है, यदि ब्याज की दर अधिक हो या व्यवहार अविवेकपूर्ण हो;

( iii ) बैंक दरों के अनुपात में तय किये गये एक स्तर से अधिक होने पर ब्याज