21. मंत्रालय सत्ता में चूर प्रतीत होता है। - Page 295

278 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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सरकार सत्ता के नशे में लगती है
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- बम्बई, गुरुवार *

’बम्बई के श्रमजीवी वर्ग के नाम पर विधि और व्यवस्था के नाम पर और प्रांत के उत्तम प्रशासन के नाम में, मैं माननीय श्री मुंशी के नियंत्रणाधीन पुलिस विभाग द्वारा विरोध हड़ताल की षड़यंत्रकारी कुव्यवस्था के बारे में निष्पक्ष और सार्वजनिक जांच की मांग करता हूं। मैं पुलिस द्वारा बारम्बार की गई पूरी तरह अवांछनीय गोलियां और लाठियां बरसाने के बारे में सार्वजनिक जांच की मांग करता हूँ’ इंडीपेडेट लेबर पार्टी के नेता डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने प्रेस को दिए एक वक्तव्य में ये विचार व्यक्त किए। ख्1,

डॉ. अम्बेडकर ने पूछा, ’कांग्रेस सरकार को क्या हो गया कि वह ऐसे अशोभनीय आतंक का सहारा लिए बिना एक दिन की हड़ताल की व्यवस्था नहीं कर पाई।’

’इससे पहले भी बहुत हड़तालें हुई हैं जो कई दिन, कई सप्ताह और महीनों चली थीं। एक हड़ताल तो साढ़े सात महीने चली थी जिसमें हर रोज जुलूस निकाले गए थे, सभाएं हुई थीं और प्रदर्शन हुए थे। इस पूरी अवधि के दौरान ऐसी कोई लाठियां और गोलियां नहीं चली थीं।’

’आज कांग्रेस राज में हम एक दिन की हड़ताल भी बिना दमन और आतंक के नहीं कर सकते। कांग्रेस की हालत यह हो गई है।’

प्रेस

प्रेस के बारे में क्या कहें, वह प्रेस जो आजादी के लिए और मजदूरों के अधिकारों के लिए प्रतिबद्ध थी और तब तक उनके हितों का समर्थन करती रही जब तक कांग्रेस को उनकी मदद की जरूरत थी ?

आज वह प्रेस झूठ और असत्य का सहारा लेती है तथा तथ्यों के जोड़-तोड़ और छिपाने का काम कर रही है जिससे ब्रिटिश और एंग्लो-इंडियन जनरल अवश्य शर्मिन्दा होगा।

* 3 नवम्बर, 1938 ।

1 फ्री प्रेस जर्नल, तारीख 9 नवम्बर, 1938 बुधवार।