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विरोध-हड़ताल की यह कहकर निंदा की जाती है कि वह नाकाम रही है, वह ढकोसला भर रह गई है, कार्यकर्त्ता अपने नेताओं के आदेशों का उल्लंघन करते हैं। जो लोग हड़ताल पर गए थे उनके बारे में यह माना जाता था कि उन्हें ’’डराया-धमकाया गया है,’’ दबाया गया है’’, ’’आतंकित किया गया है’’, ’’उनके साथ जोर-जबरदस्ती की गई है’’ आदि-आदि।
लोग इन शब्दों से परिचित हैं। लेकिन अभी तक इनका प्रयोग प्रेस द्वारा किया जाता था जिसे राष्ट्रविरोधी माना जाता था। आज ये शब्द कांग्रेस और कांग्रेस समर्थक प्रेस की ओर से आ रहे हैं। त्रासदी यही है। आज हमें इसी दुखद वास्तविकता का मुकाबला करना है।
’’मैं इन जनरलों से पूछता हूं, आपकी सच्चाई और अहिंसा को क्या हो गया है, आपकी सामान्य शिष्टता को क्या हो गया है ?’’
’जहां तक कार्यकर्ताओं का संबंध है, उन्हें इस हरकत से या अन्य किसी भी प्रचार से गुमराह नहीं किया जा सकता। वे ‘व्यापार विवाद विधेयक’ विरोधी विशाल
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‘’कांग्रेस शासन और कांग्रेसी नेता इस एक बात को साफ तौर पर याद रखें कि कार्यकर्ताओं पर जो लाठियां बरसाई गई हैं, श्रमजीवी वर्ग के सदस्यों पर जो गोलियां चलाई गई हैं उनकी गूंज आने वाले हफ्तों और महीनों में इस शहर और इस प्रेजिडेन्सी में बार-बार सुनाई देगी।’’
‘’उन लाठियों और गोलियों की गूंज आगामी नगरपालिका चुनावों में सैकड़ों मंचों से और सैकड़ों सभाओं में सुनाई देगी। उन लाठियों और गोलियों की कीमत कांग्रेस को उससे कहीं अधिक चुकानी होगी जितनी उसके नेता आज समझते दिखाई पड़ते हैं।’’
‘‘हमारे अधिकारों और हमारी आजादी पर किए गए ये हमले इस प्रांत के सबसे दूर-दराज के कोनों और इस प्रेजिडेन्सी के सुदूर गांवों में सुनाई देंगे।’’
‘’लगता है कांग्रेस सरकार सत्ता के नशे में चूर है। लगता है वे लोकतंत्र के एक बहुत बड़े पाठ से अनजान हैं कि संसदों और विधानमंडलों में शक्तिशाली बहुसंख्या को मात्र एक घटना से, एक गलत कदम उठाए जाने से, एक रात में उखाड़ फेंक दिया जाता है। लेकिन यह सबक बम्बई नगरपालिका चुनावों में याद आएगा, यह तब याद आएगा जब सरकार एक बार फिर मतदाताओं से रूबरू होगी।’’
‘’मुझे इसमें तनिक भी संदेह नहीं है कि यह सबक घातक परिणाम के साथ याद आएगा।’’