280 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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किसानों के साथ अन्याय
प्रकाशम् समिति की सिफारिशों का विश्लेषण
इंडीपेंटेंट लेबर पार्टी के नेता डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने निम्नलिखित वक्तव्य जारी किया है -
मैंने जमींदारी क्षेत्रों के हालात पर प्रकाशम् समिति की सिफारिशों को पढ़ा है। जमींदार राजस्व के (एसाइनी) समनुदेशिती से अधिक कुछ नहीं हैं, यह मत न्यायोचित हो सकता है, समिति का यह कहना कि वास्तविक किसान को भूमि के स्वत्वधारियों की जमीन में कोई काश्तकारी अधिकार नहीं मिल सकते, न तो कानूनी तौर पर सही है, न ही किसानों के लिए न्यायसंगत है, और न ही कृषि अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ विकास में सहायक है।
कानून की दृष्टि से यह गलत है, क्योंकि पिछली शताब्दी के दौरान विकसित स्वत्वधारी अधिकारों की श्रेणियों को समस्त काश्तकारी विधानों में विधिक मान्यता प्रदान की गई है। यह किसानों के लिए न्यायसंगत नहीं है, क्योंकि कम लगान या राजस्व नियत करने का प्रयोजन उसके लिए एक बड़ा अधिशेष छोड़ना है, और उसे एक अनवरत आमदनी उपलब्ध करानी है तथा अभाव के सालों में उसकी खेती-बाड़ी में सुधार करके उसकी भरपाई करनी है, न कि असंख्य छोटे-छोटे जमींदारों को जन्म देना जो जमींदार और किसान दोनों की कीमत पर अपने आपको मालदार बनाएं।
यह कृषि के हितों के विपरीत है, क्योंकि स्वत्वधारी व्यक्तियों को संपदा के रूप में भूमि का दोहन इस प्रकार नहीं करने दिया जाना चाहिए जिससे किसान पर बोझ पड़े, और जो खेतीबाड़ी के प्रयोजनों में इस्तेमाल के लिए जमीन के संरक्षण के प्रतिकूल हो।
प्रकाशम् समिति की रिपोर्ट किसानों से वसूल की गई मालगुजारी के वरिष्ठ भूधारकों में वितरण के निर्धारण से अधिक कुछ नहीं है।
विधानमंडल में पूछे गए एक प्रश्न पर श्री प्रकाशम् का यह उत्तर कि रैयतबाड़ी
क्षेत्रों में अभिधृति विधान नहीं लाया जाएगा क्योंकि रैयतबाड़ी भू-धारक जमीन के स्वत्वधारी होते हैं, कांग्रेस शासन की ओर से किसानों को मिलने वाली भलाई की