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मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि मद्रास में अनुसूचित जाति के प्रतिनिधि ऐसे किसी विधान में पक्षधर नहीं बनेंगे जो स्वत्वधारी अधिकारों के नाम पर मालगुजारी वसूलने वालों का एक नया वर्ग पैदा करता है। मेरा विचार है कि ऐसे किसी विधान को समर्थन देना किसानों के हितों पर भारी कुठाराघात होगा।’’ ख्1,
- द बम्बई क्रोनिकल, तारीख 18 जनवरी, 1939, डब्ल्यू 1054 - 19।