23. डॉ. अम्बेडकर की ग्वायर निर्णय को चुनौती। - Page 303

286 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

व्यक्ति को नये संविधान की रूपरेखा सौंपूँ। गांधी जी इस प्रस्ताव से सहमत नहीं हो सके। उनका तर्क था कि ऐसी रिपोर्ट अंतिम होनी चाहिए।’’

डॉ. अम्बेडकर आज शाम रेलगाड़ी से बम्बई के लिए रवाना हो गए - यूनाईटेड प्रेस’’ ख्1,

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’’ग्वीयर अधिनिर्णय को डॉ. अम्बेडकर की चुनौती

यह बताने के लिए निर्णय उद्धृत किए कि ’’सिफारिश’’ समादेश नहीं होती।

डॉ. अम्बेडकर ने ग्वीयर अधिनिर्णय का कानूनी विश्लेषण करते हुए कहा-

राजकोट के ठाकुर साहेब और श्री वल्लभ भाई पटेल के बीच ’सिफारिश’ शब्द की व्याख्या पर हुए विवाद के बारे में सर मौरिस ग्वीयर द्वारा दिया गया अधिनिर्णय विवाद के पक्षकारों के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि जनसामान्य के लिए भी महत्वपूर्ण है।

अधिनिर्णय के पक्षकारों के लिए अधिनिर्णय से आबद्ध होने के कारण यह प्रश्न ज्यादा उपयोगी नहीं है कि यह व्याख्या सही है या गलत, लेकिन जनता के बारे में स्थिति ऐसी नहीं है। उनके लिए यह प्रश्न अब भी रोचक है। यह सच है कि अधिनिर्णय किसी न्यायालय का फैसला नहीं है। फिर भी उसमें सर मौरिस ग्वीयर जैसे बड़े नाम का प्राधिकार निहित है।

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ऐसे सिद्धांतों को दिमाग से समझने के लिए सबसे पहले यह बताना आवश्यक है कि ठाकुर साहब की क्या दलील थी और सर मौरिस ग्वीयर ने उस पर क्या फैसला दिया था ?

सर मौरिस ग्वीयर ने उसका सारांश इस प्रकार दिया था - ’’ठाकुर साहब के तर्क का सार उनकी ओर से प्रस्तुत लिखित पक्षकथन में निम्नलिखित वाक्य में

  1. द बम्बई क्रोनिकल, तारीख 20 अप्रैल, 1939।