23. डॉ. अम्बेडकर की ग्वायर निर्णय को चुनौती। - Page 305

288 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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पूर्वोदाहरण और सिद्धांत

सम्यक् आदर के साथ, मैं यह कहना चाहता हूं कि पूर्वोदाहरण से समर्थित एक सुस्थापित सिद्धांत है जिसका सहारा इस निर्देश (रेफरेन्स) का फैसला करने के लिए लिया जा सकता है। नॉट बनाम कोट्टी (2 फिल 192 = 41 इंग्लैंड रिपोर्ट्स 915) नामक निर्णय मेरे दिमाग में है। इस निर्णय के तथ्यों का बहुत संक्षेप में उल्लेख इस प्रकार किया जा सकता है :

’क’ ने अपनी वसीयत बनाई और अपनी पत्नी को ( श्री कोट्टी को और एक श्री इब्बेटसन को निष्पादक और ट्रस्टी (न्यासी) नियुक्त किया। साथ ही उन्होंने इन तीनों को अपने बालकों के संरक्षक के रूप में नियुक्त किया। आगे ’क’ ने सिफारिश की कि यदि उसकी पत्नी का निधन उसके पुत्र के 21 वर्ष का होने से पहले अथवा उसकी पुत्रियों के 21 वर्ष की होने और विवाह कर लेने से पहले हो जाए तो उत्तरजीवी संरक्षक या संरक्षकगण उसके बालकों को, अथवा उन बालकों को जो उस समय अवयस्क हों, उसके चचेरे भाई मेरी प्रायर की देखरेख में सौंप दें। ’क’ की पत्नी का निधन हो गया तथा उत्तररजीवी निष्पादक और वसीयती संरक्षक श्री कोट्टी ने बालकों को मेरी प्रायर की देखरेख में सौंप दिया। उस मामले में इस धारणा पर आगे कार्यवाही चली कि ’सिफारिश’ शब्द का अर्थ यह है कि वसीयती संरक्षक पर एक बाध्यकर विश्वास (न्यास) पैदा किया गया जिससे श्री कोट्टी मेरी प्रायर को बालकों की देखरेख करने वाले व्यक्ति के रूप में नियुक्त करने के लिए आबद्ध था।

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अंतर्निहित शक्तियां

मुद्दा था .................... क्या सिफारिश द्वारा वसीयती संरक्षक के नाते भी कोट्टी की समस्त नियंत्रण शक्तियां छीन ली गईं ? इस मुद्दे का विनिश्चय करने के लिए लार्ड चांसलर (लार्ड डेनमेन) ने कहा था................’’ मुझे ’सिफारिश’ शब्द के अर्थ पर विचार करने के अनेक मौके मिले। ऐसा एक मौका इस न्यायालय में हाल ही में एक मामले में मिला जिसमें प्रश्न उठा था कि क्या वसीयतकर्ता द्वारा की गई इस सिफारिश ने कि उसकी संपत्त्सि के रिसीवर और प्रबंधक के रूप में कोई व्यक्ति नियुक्त किया जाना चाहिए, उस व्यक्ति को कोई कानूनी हित प्रदान कर दिया था।

दूसरा मामला शॉ बनाम लालैस का था, जिसमें हाउस ऑफ लार्ड्स ने यह सिद्धांत प्रतिपादित किया था, जिसके अनुसार मैंने कार्रवाई की है, कि यद्यपि कुछ