290 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
एक अन्य नजीर
एक दूसरी नजीर है जॉनसन बनाम रॉवलैंड्स (17 एल. जे. च. 438) जिसका इस
संबंध में उल्लेख करना उपयोगी है। इस मामले में, प्रश्न वसीयत में प्रयुक्त सिफारिश शब्द की व्याख्या का था। वसीयत में, वसीयतकर्ता ने कहा था, ’’मैंने वह (कुछ धनराशि) ऐसे ढंग से खर्च करने के लिए दी थी जैसे वह उचित समझे। लेकिन उसके लिए मेरी सिफारिश है कि वह अपने स्वयं के रिश्तेदारों को उसमें से आधी रकम दे दे।’’ वसीयतकर्ता की सिफारिश के अनुसार वसीयतदार ने आधी रकम अपने निजी रिश्तेदारों को नहीं दी। प्रश्न यह था कि क्या वह सिफारिश से विचलन कर सकती थी। न्यायालय ने अभिनिर्धारित किया कि वह ऐसा कर सकती थी। उस निर्णय की भाषा के अनुसार ’सिफारिश’ से समादेश अभिप्रेत हो सकता है। किन्तु यदि वह उस व्यक्ति की, जिससे सिफारिश की जाए, सिफारिश से विचलन करने की कानूनी और साम्यिक शक्ति से असंगत है तो उसका अर्थ समादेश नहीं हो सकता।
यह सच है कि ठाकुर साहब द्वारा लिखे गए पत्र की भाषा जॉनसन बनाम
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रॉवलैंड्स वाले मामले में ’वसीयत’ की भाषा से भिन्न है। लेकिन मान लीजिए ठाकुर साहब द्वारा श्री बल्लभ भाई पटेल को लिखा गया पत्र इन शब्दों में लिखा गया हो (हमें अपनी पसंद की समिति गठित करने का अधिकार है। लेकिन आप समिति में नियुक्त करने के लिए सात व्यक्तियों के नामों की सिफारिश करें। हम उन्हें नियुक्त कर देंगे।’’ यह सच है कि ठाकुर वाले मामले में, उनके और बल्लभ भाई पटेल के बीच सहमति है। जबकि जॉनसन बनाम रॉवलैंड्स वाले मामले में वसीयतदार और
उसके रिश्तेदारों के बीच ऐसी कोई सहमति नहीं थी। बहरहाल, हम इस सवाल पर विचार नहीं कर रहे हैं कि क्या वह सहमति ठाकुर साहब पर आबद्धकर है और उनके खिलाफ प्रवर्तनीय है जो उनके द्वारा क्राउन की अपनी हैसियत में दी गई है। वह एक भिन्न प्रश्न है और उससे महत्वपूर्ण मुद्दे उत्पन्न होते हैं।
अनुपस्थित वाक्यांश
यहां हमारा संबंध इस मुद्दे से है कि सिफारिश शब्द का क्या अर्थ है और इस मुद्दे के बारे में जॉनसन बनाम रॉवलैंड्स वाला मामला ठाकुर साहब बनाम बल्लभ
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भाई पटेल के मामले में पूरी तरह लागू होता है। बल्लभ भाई पटेल को संबोधित ठाकुर साहब के पत्र में ’’हमें अपने ढंग से समिति गठित करने का अधिकार प्राप्त है’’ शब्दों की अनुपस्थिति के संबंध में, मेरा निवेदन है कि इससे कोई अंतर नहीं पड़