25. जब बुद्ध ने पशु बली रोकी तो, उनके द्वारा गाय को पवित्र माना गया। - Page 312

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इंडीपेंडेंट लेबर पार्टी के नेता डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने हमारे प्रतिनिधि से बात करते हुए अस्पृश्यता की उत्पत्ति की एक नई विचारधारा का सूत्रपात किया।

उल्लेखनीय है कि अस्पृश्यता एक ऐसी संस्था या सामाजिक परिपाटी है जो भारत की अनन्य संपत्ति है और विश्व में अन्यत्र कहीं इसका अस्तित्व नहीं है। एकाधिक अर्थ में यह एक संस्था है जो अप्राकृतिक है और मानव मनोविज्ञान तथा सामाजिक ताकतों के प्रतिकूल है। इसलिए अस्पृश्यता की उत्पत्ति के कारण, जो संकल्प लेकर चले, वे ऐसे होंगे जो समस्त सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक विचारणाओं से ऊपर होंगे।

डॉ. अम्बेडकर के अनुसार, अस्पृश्यता की उत्पत्ति अपेक्षाकृत हाल में हुई थी और संभवतः वैदिक काल में या उसके उत्तरकाल में शताब्दियों तक नहीं रही होगी। वेदों में कहीं भी अस्पृश्यता का निश्चय ही कोई उल्लेख नहीं है। तब यह अस्तित्व में कैसे आई ?

अर्द्ध-जनजातीय अवस्था

डॉ. अम्बेडकर एक ऐसे युग को चित्रित करते हैं जिसमें कुछ लोग हाल ही में

खेतीबाड़ी करने के लिए एक स्थान पर बस गए थे जबकि अन्य लोग अपनी भेड़ बकरियां और पशु लेकर जगह-जगह घूमते हुए खानाबदोश अवस्था में रहते थे।

खेतीबाड़ी करने वाले लोग अपनी जमीन, मकान, फसल आदि पूंजी के साथ,

खानाबदोश जनजातियों की तुलना में अधिक सभ्य अवस्था में, ये ओर स्वभाविक रूप से, यह नहीं चाहते थे कि कोई घुमक्कड़ जनजातियां उनके शांतिपूर्ण जीवन में विघ्न पैदा करें। और न ही उनका उन पशु चराने वाली जनजातियों से कोई मुकाबला था जिनके पास अचल संपत्ति की कोई जिम्मेदारी नहीं थी तथा निश्चित रूप से शारीरिक दृष्टि से ज्यादा मजबूत और ज्यादा लम्बे चौड़े थे।

इसलिए घुमक्कड़ जनजातियों के हमलों से अपनी संपत्ति की रक्षा करने के लिए