25. जब बुद्ध ने पशु बली रोकी तो, उनके द्वारा गाय को पवित्र माना गया। - Page 314

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दिया। वे बलि के लिए गाय खोजकर लाते थे और परिणामस्वरूप दूध एवं अन्य दूध उत्पादों से वंचित रह जाते थे जो उनकी आजीविका के मुख्य साधन थे।

इन पशु बलियों की मात्रा का सबूत वेदों में समारोहों के भयंकर वर्णनों में आज भी देखा जा सकता है जिनसे पता चलता है कि उनमें मानवीय तत्व तनिक भी विद्यमान नहीं था। इस प्रकार जब बुद्ध ने पशु बलि की समाप्ति और धार्मिक अनुष्ठानों की समाप्ति का उपदेश दिया तो जनसाधारण ने उनका उत्कट भाव से स्वागत किया और ब्राह्मणवादी उपदेशों को मानने से इंकार कर दिया। उन्हें नई विचारधारा आर्थिक और नैतिक दोनों दृष्टि से अच्छी लगी।

बौद्ध धर्म के बढ़ते प्रभाव से ब्राह्मण धर्म कैसे बच पाया ? उसने हिन्दू धर्म के बलि और धार्मिक अनुष्ठानों वाले भाग को एकदम छोड़ दिया। उन्होंने बुद्ध को पछाड़ने की दृष्टि से, अब तक काटी जानेवाली गाय को पूज्य बना दिया गया।

मांसाहारी ब्राह्मण कट्टर शाकाहारी बन गए। मदिरा पान बंद हो गया। हिंदू धर्म ने विशुद्धतापरक आवरण धारण कर लिया।

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क्षत्रियों के साथ समझौता

क्षत्रियों को बौद्ध धर्म अपनाने से रोकने के लिए ब्राह्मणों ने उन्हें अपने समकक्ष स्थान दे दिया। डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि अन्य सैंकड़ों संदर्भों के अलावा एक धार्मिक ग्रंथ में वास्तव में एक पद्य रचना है जिसमें कहा गया है कि जैसे एक कैदी को भागने से रोकने के लिए उसके दोनों तरफ दो सिपाही तैनात रहते हैं ठीक उसी प्रकार वैश्यों और शूद्रों को अपने हाथ से न निकलने देने के लिए ब्राह्मण और क्षत्रिय एक साथ सक्रिय रहते हैं।

गाय पूज्य कैसे बन गई

गाय को पूज्य मानने तथा बलि समारोह का अंत हो जाने के कारण और असंख्य अन्य बौद्ध उपदेशों के हिन्दू धर्म में समाविष्ट हो जाने पर, जो जनसमूह, बौद्ध धर्म की तरफ चला गया था, वह धीरे-धीरे वापस लौटने लगा। महान उपदेश जिसे ब्राह्मणों ने स्वीकार नहीं किया, वे समता का सिद्धांत और चतुर्वर्ण जाति प्रथा का अंत थे। लेकिन उन्होंने एक काम किया। उन्होंने उस समय क्षत्रियों को अपने समकक्ष स्तर