25. जब बुद्ध ने पशु बली रोकी तो, उनके द्वारा गाय को पवित्र माना गया। - Page 315

298 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

पर रखा, जन्म से ब्राह्मण देवताओं को पृष्ठभूमि में पहुंचा दिया, उनके स्थान पर क्षत्रिय देवताओं को रख दिया और समय के अनुकूल अन्य समझौते किए।

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एक अत्यंत अप्रत्याशित घटना, जो बुद्ध के लिए सर्वथा घृणास्पद होती, ब्राह्मणों के सहयोग और समझौते के अभियान की प्रक्रिया में घटित हुई। गाय की बलि बुद्ध द्वारा बंद की गई। गाय को ब्राह्मणों द्वारा पूज्य बना दिया गया। सामान्य हिन्दू समाज ने वह पवित्रता स्वीकार कर ली और गायों की हत्या बंद कर दी। ऐसा ही वर्तमान युग के अछूतों द्वारा भी किया गया। लेकिन अछूत इतने गरीब थे कि वे ताजा मांस या गाय का मांस किसी भी समय इस्तेमाल नहीं कर सकते थे, इसलिए वे मृत गायों की लाश को खाने की युगों पुरानी परिपाटी चलाते रहे।

बुद्ध या ब्राह्मणों ने लाश खाना मना नहीं किया था। निषेध केवल जिन्दा गाय को काटने पर था। लेकिन आधुनिक अछूतों ने एक बहुत बड़ा अपराध किया। चूंकि वे सबसे गरीब थे, सामाजिक दृष्टि से सबसे निचले स्तर पर थे, इसलिए वे बौद्ध धर्म में सबसे लंबे समय तक रहे। उन्हें वापस लाने के लिए एक शक्तिशाली बड़ी ताकत का सैंकड़ों वर्ष तक काम करना आवश्यक था। जब दूसरी किसी चीज ने काम नहीं किया तो सामाजिक बहिष्कार और अस्पृश्यता का इस्तेमाल किया गया।

मृत गाय खाने की उनकी परिपाटी का शोषण उनके खिलाफ किया गया। यह एक ऐसी चीज थी जो स्वभावतः हिन्दू मन को अस्वीकार थी। यह घिनावनी थी। ब्राह्मण कठिनाई के बिना इस स्थिति को अपने पक्ष में इस्तेमाल कर सकते थे। इस प्रकार पूरे वर्ग पर अस्पृश्यता थोप दी गई। जब दूसरे लोगों ने बौद्ध धर्म छोड़ दिया था तब भी उस पर डटे रहने का यह, वास्तव में, एक दंड था। इस प्रकार अस्पृश्यता, शिक्षा तथा स्वतंत्रता और सामाजिक समता के सभी आधुनिक विचारों के बावजूद आज भी जारी है।’’ ख्1,

  1. द बम्बई क्रोनिकल : तारीख 24 फरवरी, 1940।